#विविध
June 21, 2026
विक्रमादित्य सिंह के विभाग की नई पहल: वैज्ञानिक पद्धति से तैयार की 4 सड़कें; खर्च आधा- मजबूती ज्यादा
लोक निर्माण विभाग ने चार सड़कों के पुनर्निर्माण में अपनाई एफडीआर तकनीक
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण के क्षेत्र में अब आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में विभाग ऐसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा हैए जिनसे सड़कें अधिक मजबूतए सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहें। इसी दिशा में लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश की चार महत्वपूर्ण सड़कों का पुनर्निर्माण आधुनिक एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से किया हैए जिसे सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और वैज्ञानिक पद्धति माना जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग का मानना है कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में आधुनिक तकनीक से बनी सड़कें अधिक समय तक बेहतर स्थिति में रहती हैं। यही वजह है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-3) के तहत करसोग क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के प्रयोग को प्राथमिकता दी है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सड़क निर्माण की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
यह भी पढें : हिमाचल बिजली बोर्ड महिलाओं को देगा 12300 रुपए प्रतिमाह कमाने का मौका; जल्द करें आवेदन
करसोग क्षेत्र में करीब 44.50 करोड़ रुपये की लागत से चार प्रमुख सड़कों का पुनर्निर्माण किया गया है। इनमें खील-भगालू, खील-कुफरी माहूंनाग, चलोग-बगैला और केलोधार-स्यांज सड़कें शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा का लाभ मिल रहा है।
एफडीआर यानी फुल डेप्थ रिक्लेमेशन सड़क निर्माण की एक अत्याधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है। इस तकनीक में पुरानी और क्षतिग्रस्त सड़क की परतों को पूरी गहराई तक पुनः उपयोग में लाया जाता है और उसी सामग्री को मजबूत आधार के रूप में विकसित किया जाता है। इसके बाद उस पर नई सड़क तैयार की जाती है। इससे सड़क की नींव मजबूत होती है और उसकी आयु भी काफी बढ़ जाती है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: "मां मां... पापा ने फं*दा लगा लिया"... बेटे ने मायके गई मां को दी सूचना, सदमें में पूरा परिवार
हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में बारिश, भूस्खलन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़कों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। ऐसे में एफडीआर तकनीक सड़क की निचली परतों को भी मजबूत बनाती है, जिससे सड़क लंबे समय तक खराब नहीं होती। यही वजह है कि इसे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एफडीआर तकनीक से तैयार की गई सड़कें पारंपरिक सड़कों की तुलना में अधिक टिकाऊ होती हैं। इससे बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती और रखरखाव पर होने वाला सरकारी खर्च भी कम हो जाता है। इसके साथ ही लोगों को बेहतर यातायात सुविधा लगातार मिलती रहती है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: खाई में गिरी पिकअप के नीचे दबा चालक, परिवार का था इकलौता सहारा; पीछे छोड़ गया दो बच्चे
इस तकनीक का एक बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण भी है। पुरानी सड़क सामग्री को दोबारा उपयोग में लाने से नई निर्माण सामग्री की आवश्यकता कम होती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है और निर्माण कार्य के दौरान निकलने वाले मलबे में भी कमी आती है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार एफडीआर तकनीक से निर्मित सड़कें अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ साबित हो रही हैं। विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में विभाग प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने के लिए लगातार नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा है, ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: शख्स को टक्कर मा.र फरार हुआ वाहन चालक, सड़क पर त.ड़पता रहा घायल; थम गईं सांसें
करसोग क्षेत्र में आधुनिक एफडीआर तकनीक से तैयार की गई सड़कें इस बात का उदाहरण हैं कि अब हिमाचल में सड़क निर्माण केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सोच, तकनीकी नवाचार और दीर्घकालिक गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश के सड़क नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।