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June 18, 2026

महिलाओं की 1500 रुपये पाने की राह हुई आसान: सुक्खू सरकार ने हटाई बड़ी बाधा; किया ये बदलाव

अब पंचायतों में नहीं लटकेंगे महिलाओं के आवेदन, सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार की सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना को लेकर लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने प्रदेश की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस वादे को पूरा करने के लिए योजना शुरू भी की और हजारों महिलाओं को इसका लाभ मिला।

सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला

हालांकि योजना शुरू होने के बाद से ही पात्रता शर्तों और प्रक्रियाओं में लगातार बदलाव होते रहे, जिसके कारण बड़ी संख्या में महिलाएं आज भी इस सहायता राशि से वंचित हैं। कई महिलाओं के आवेदन महीनों तक सरकारी फाइलों में अटके रहे और उन्हें योजना का लाभ मिलने का इंतजार करना पड़ा। अब सुक्खू सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए महिलाओं की सबसे बड़ी परेशानी दूर कर दी है। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट बन चुकी ग्राम पंचायत सत्यापन व्यवस्था को समाप्त कर दिया है, जिससे अब महिलाओं के आवेदन लंबे समय तक पंचायतों में नहीं लटकेंगे।

 

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चुनावी वादे से शुरू हुई थी योजना

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर महीने 1500 रुपये देने का बड़ा वादा किया था। सत्ता में आने के बाद सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना शुरू की और चरणबद्ध तरीके से पात्र महिलाओं को इसका लाभ देना शुरू किया। लेकिन योजना के क्रियान्वयन के दौरान कई नई शर्तें और प्रक्रियाएं जोड़ी गईं, जिसके चलते बड़ी संख्या में महिलाओं को लाभ मिलने में देरी होने लगी।

पंचायतों में फंस रहे थे हजारों आवेदन

योजना के तहत प्राप्त आवेदनों का सत्यापन ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जा रहा था। इसके लिए आवेदन पंचायतों में भेजे जाते थे, जहां ग्राम सभा की बैठक में उनकी पुष्टि की जाती थी। मगर प्रदेश के कई हिस्सों में ग्राम सभाओं में कोरम पूरा नहीं हो पाया। नतीजतन हजारों आवेदन पंचायत कार्यालयों में ही लंबित रह गए। कई महिलाएं बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो गईं, लेकिन उनके आवेदन आगे नहीं बढ़ पाए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों आवेदन सत्यापन के लिए पंचायतों को भेजे गए थे, लेकिन उनमें से बहुत कम आवेदनों का ही समय पर सत्यापन हो पाया। शेष आवेदन महीनों तक लंबित पड़े रहे।

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अब सीधे तहसील स्तर पर होगा सत्यापन

महिलाओं की परेशानी और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए सरकार ने अब पूरी व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब आवेदन पंचायतों में नहीं भेजे जाएंगे। महिला जैसे ही अपना आवेदन तहसील कल्याण अधिकारी के कार्यालय में जमा करेगी, वहीं पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद पात्र आवेदनों को मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलते ही लाभार्थी महिला के खाते में मासिक सहायता राशि जारी कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से आवेदन प्रक्रिया तेज होगी और पात्र महिलाओं को समय पर योजना का लाभ मिल सकेगा।

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लाखों महिलाओं को मिल सकती है राहत

योजना शुरू होने के बाद प्रदेशभर से आठ लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया था। लेकिन सत्यापन प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए थे। अब पंचायत स्तर की बाधा हटने से हजारों महिलाओं के लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होने की उम्मीद है। इससे उन महिलाओं को भी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से सहायता राशि मिलने का इंतजार कर रही हैं।

योजना में पहले भी हुए कई बदलाव

हालांकि इस योजना में समय-समय पर कई संशोधन किए जा चुके हैं। पहले जहां योजना का दायरा अधिक व्यापक था, वहीं बाद में पात्रता शर्तों को सख्त किया गया। सरकार ने परिवार की वार्षिक आय की सीमा निर्धारित की, एक परिवार से केवल एक महिला को लाभ देने का प्रावधान लागू किया और अब आयु सीमा में भी बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाएं ही योजना का लाभ ले सकेंगी। इन्हीं बदलावों के कारण कई महिलाएं योजना के दायरे से बाहर भी हुई हैं, जिसके चलते विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा है।

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महिलाओं तक तेजी से पहुंचे लाभ

सरकार का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाने का मुख्य उद्देश्य पात्र महिलाओं तक सहायता राशि को बिना अनावश्यक देरी के पहुंचाना है। पंचायत स्तर पर फाइलों के अटकने और ग्राम सभाओं के कोरम की समस्या को खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कितनी तेजी से लंबित आवेदनों का निपटारा होता है और कितनी महिलाओं को लंबे इंतजार के बाद 1500 रुपये मासिक सहायता का लाभ मिल पाता है।

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