शिमला। हिमाचल प्रदेश में कभी गांव के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए लोगों ने अपनी पुश्तैनी जमीन तक दान कर दी थी। उम्मीद थी कि गांव में स्कूल रहेगा तो बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कम विद्यार्थियों के चलते कई सरकारी स्कूल बंद हो गए या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए गए। इसके बाद जमीन दान करने वाले लोग अपनी जमीन वापस मांगने लगे हैं। 

बच्चों की पढ़ाई के लिए दान की थी जमीन

गांव में स्कूल खुलने से बच्चों को घर के पास ही पढ़ाई करने का मौका मिलता था। इसी उम्मीद में कई लोगों ने अपनी जमीन दान कर दी थी। कुछ लोगों ने जमीन का छोटा हिस्सा दिया, तो कुछ ने स्कूल भवन बनाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक दे दी। उस समय उनका मकसद यही था कि गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर न जाना पड़े और उनका भविष्य बेहतर बन सके।

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स्कूल बंद हुए तो जमीन को लेकर उठने लगे सवाल

जब विद्यार्थियों की संख्या कम होने लगी, तो कई स्कूलों को बंद कर दिया गया या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। इसके बाद जमीन दान करने वाले लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ दानदाता अब अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। इस मामले को लेकर शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी जिलों के प्रारंभिक और उच्च शिक्षा उपनिदेशकों को पत्र जारी किया है। इसमें ऐसे स्कूलों और उनसे जुड़ी जमीन के मामलों की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

शिक्षा विभाग के पास भी पूरी जानकारी नहीं

शिक्षा विभाग को अभी यह भी पूरी तरह पता नहीं है कि कितने स्कूलों के लिए जमीन दान की गई थी, लेकिन उसका इंतकाल विभाग के नाम नहीं हुआ है। रतन साईं बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले की न्यायालय में सुनवाई के दौरान विभाग ने जमीन दान से जुड़े दस्तावेजों, इंतकाल और दूसरे रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। अब विभाग को इन मामलों का पूरा ब्योरा सरकार को देना है।

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चार तरह के मामलों की मांगी रिपोर्ट

शिक्षा विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों की जानकारी चार श्रेणियों में मांगी है।

  • पहली श्रेणी: ऐसे स्कूल जो बंद हो चुके हैं या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए गए हैं, लेकिन उनकी जमीन दान से जुड़े दस्तावेज और इंतकाल का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
  • दूसरी श्रेणी: ऐसे बंद या मर्ज हो चुके स्कूल, जिनकी जमीन के दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन दानदाता अब जमीन वापस मांग रहे हैं।
  • तीसरी श्रेणी: ऐसे स्कूल जो अभी भी चल रहे हैं। इनके लिए जमीन दान की गई थी और दस्तावेज भी मौजूद हैं, लेकिन दानदाता अब जमीन वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
  • चौथी श्रेणी: ऐसे स्कूल जो अभी चल रहे हैं, लेकिन उनकी जमीन के दानपत्र और इंतकाल की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है।

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पौने चार साल में 1526 स्कूल बंद और मर्ज

हिमाचल प्रदेश में सरकार ने पौने चार साल के दौरान कुल 1526 स्कूल बंद किए हैं या दूसरे स्कूलों में मर्ज किए हैं। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी, उन्हें डी-नोटिफाई कर दिया गया। वहीं, जिन स्कूलों में पांच या इससे कम विद्यार्थी थे, उन्हें आसपास के दूसरे स्कूलों में मर्ज किया गया। अब इन स्कूलों के लिए दान की गई जमीन का मामला चर्चा में है और शिक्षा विभाग इसकी पूरी जानकारी जुटाने में लगा है।