सिरमौर। भाई-दूज का त्योहार तो आम है लेकिन हिमाचल में आम बातें कहां होती हैं। एक तरफ जहां हर जगह लोग भाई दूज का त्योहार मनाते हैं, वहीं हिमाचल के सिरमौर जिले में सास-दामाद दूज मनाई जा रही होती है। गिरिपार व सैनधार इलाके में ये परंपरा सदियों से कायम है।

भाई-दूज की जगह मनाते सास-दामाद दूज

इन क्षेत्रों में हिंदूओं के कई त्योहारों को अलग तरह से मनाया जाता है। इसी कड़ी में आता है देशभर में मनाया जाने वाला भाई-दूज का त्योहार। यहां भाई दूज की जगह सास-दामाद दूज मनाई जाती है। इस मौके पर दामाद सास को तोहफे देकर उनसे आशीर्वाद लेते हैं।

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खास छुट्टी लेकर ससुराल जाते हैं दामाद

प्रचलित परंपरा के अनुसार इस दिन दामाद अपनी सास को- गुड़, मिठाई, चावल, 100 अखरोट और घी के अलावा सास के पसंदीदा तोहफे उन्हें दे सकते हैं। ये परंपरा इस क्षेत्र के लिए इतनी महत्वपूर्ण है कि फौजी दामाद, दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले दामाद खास छुट्टी लेकर अपने ससुराल पहुंचते हैं।

वर्षों से चली आई परंपरा निभाते हैं दामाद

अगर दामाद किसी कारण अपनी सास को तोहफे ना दे पाए तो दामाद आने वाले ज्ञास पर्व तक सास को उपहार दे सकता है जिसे स्थानीय भाषा में सासू भेंट कहा जाता है। ये परंपरा सिर्फ नए नवेले दामाद ही नहीं निभाते बल्कि शादी के वर्षों बाद भी ये परंपरा धूमधाम से निभाई जाती है।

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दामाद को परंपरा से छूट दे सकती है सास

वहीं अगर सास चाहे तो वो अपने दामाद को हर साल परंपरा ना निभाने की छूट भी दे सकती है। इस पर्व पर स्थानीय बाजारों में रौनक देखते ही बनती है। सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में इसी तरह की कई और परंपराएं हैं जो पूरे देश से अलग तो हैं ही बल्कि लोगों के लिए अनूठी भी हैं। 

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