शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से राज्य सूचना आयोग को कांगड़ा शिफ्ट करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्ताव तैयार है और इसे 24 नवंबर को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जा सकता है। अगर मंजूरी मिलती है तो आयोग का नया कार्यालय कांगड़ा के नगरोटा बगवां क्षेत्र में शुरू किया जा सकता है। इससे पहले भी कई बड़े विभाग जैसे राज्य पर्यटन निगम, वन्य प्राणी विंग, रेरा और नशा निवारण बोर्ड को शिमला से कांगड़ा स्थानांतरित किया जा चुका है।

खलीणी में मौजूद कार्यालय

फिलहाल राज्य सूचना आयोग का कार्यालय शिमला के खलीणी में है, जहां मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त बैठते हैं। लेकिन इस समय दोनों पद खाली हैं, और इन्हें भरने की प्रक्रिया चल रही है। आयोग में 14 नियमित कर्मचारी होने चाहिए, पर सिर्फ तीन मिनिस्ट्रियल स्टाफ रह गए हैं। बाकी कर्मचारी प्रतिनियुक्ति और आउटसोर्स पर हैं, जो कि शिफ्टिंग के फैसले पर सीधा असर डाल सकते हैं।

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कांगड़ा के नेता ने उठाया था मुद्दा

सूत्रों के अनुसार कांगड़ा जिले के एक वरिष्ठ नेता ने आयोग को कांगड़ा स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा था। इसके बाद प्रशासनिक सुधार विभाग ने डीसी कांगड़ा के साथ लोकेशन को लेकर बातचीत भी की है।यह कदम न सिर्फ सरकारी मशीनरी का पुनर्गठन माना जा रहा है, बल्कि कांगड़ा में प्रशासनिक ताकत बढ़ाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

कर्मचारियों ने सीएम से लगाई गुहार

राज्य सूचना आयोग के कर्मचारियों ने इस संभावित फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की है।

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कर्मचारियों का कहना है कि

  • आयोग को शिफ्ट करना अव्यावहारिक और गैर-जरूरी कदम है।
  • छोटा शिमला में सचिवालय के पास आयोग की नई सरकारी इमारत लगभग तैयार है।
  • प्रतिनियुक्त कर्मचारी धर्मशाला जाने पर अपने मूल विभागों में वापस लौट जाएंगे।
  • आउटसोर्स कर्मचारी धर्मशाला में महंगा किराया वहन नहीं कर पाएंगे।
  •  इससे आयोग का कामकाज प्रभावित होगा और फैसलों में देरी बढ़ सकती है।

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लोगों को हो सकती है दिक्कतें

कर्मचारियों ने तर्क दिया कि आयोग के 70–80 प्रतिशत मामले शिमला स्थित विभागों से जुड़े होते हैं, जिनके जन सूचना अधिकारी सुनवाई में शिरकत करते हैं।
यदि आयोग धर्मशाला शिफ्ट हुआ तो

  •  टीए/डीए,
  •  वाहन व्यय,
  •  और यात्रा का समय
  • सरकार और विभागों पर बड़ा वित्तीय बोझ बढ़ाएगा।

फिलहाल सभी की नजरें 24 नवंबर की कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जिसमें इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

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