मंडी। जब पहाड़ दरक रहे थे, घर मलबे में तब्दील हो रहे थे और हर कोई अपनी जान बचाने में लगा था तब भी कुछ महिलाएं ऐसी थीं, जो दूसरों की चिंता में घर-घर राहत पहुंचा रही थीं। मंडी ज़िले के सराज क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के बीच 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वह कर दिखाया, जो सरकारी तंत्र भी कई बार नहीं कर पाता। खुद के मकान तबाह होने के बावजूद, इन्होंने कर्तव्य को नहीं छोड़ा और हजारों जरूरतमंदों तक राहत व पोषण सामग्री पहुंचाई।

आपदा में सेवा की मिसाल बनीं ये 10 महिलाएं

सराज क्षेत्र की 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं,  ममता देवी (लांबशाफड़), सीता देवी (थुनाग), द्रोपदी (रोड), डोलमा देवी (कुथाह), हिमा देवी (जरोल), तेजी देवी (फंदार), लीला देवी (बन्याड़), ढमेश्वरी देवी (लोटशेगलू), चनाली देवी (पखरैर) और नर्वदा देवी (सुनाह) के घर भूस्खलन और बारिश से क्षतिग्रस्त हो गए। लेकिन इन महिलाओं ने अपने हालातों पर रोने के बजाय दूसरों की मदद को प्राथमिकता दी।

 

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संकट के समय में डटी हैं ये महिलाएं

इन्होंने न सिर्फ आंगनबाड़ी केंद्रों में सेवा दी, बल्कि राहत सामग्री लेकर सीधे लाभार्थियों के घर तक गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग की सराज परियोजना के तहत ये महिलाएं संकट की घड़ी में भी डटी रहीं और अपनी कर्तव्यनिष्ठा से सबको चौंका दिया।

 

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4782 लाभार्थियों तक पहुंचाया गया राशन

महिला एवं बाल विकास विभाग, मंडी के ज़िला कार्यक्रम अधिकारी अजय बदरेल ने बताया कि सराज परियोजना के अंतर्गत मंडी ज़िले में कुल 221 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें से 97 बालीचौकी और 124 थुनाग में हैं। इस परियोजना के तहत 4782 लाभार्थियों को पोषणयुक्त राशन वितरित किया गया।

बालीचौकी क्षेत्र में 2644 और थुनाग में 2138 लाभार्थियों तक राशन पहुंचा। साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए 32 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट भी वितरित कीं।

 

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कर्तव्य पर भारी नहीं पड़ा निजी दुख

जहां एक तरफ खुद इन महिलाओं के घरों में पानी, मलबा और तबाही थी, वहीं दूसरी ओर इनका सेवाभाव इतना दृढ़ था कि इन्होंने अपने दर्द को दरकिनार कर समाज की चिंता की। इन महिलाओं ने ये साबित कर दिया कि असली वीरता आपदा में सेवा करना है  और असली नायिका वही होती है, जो अपने दुःख से ऊपर उठकर दूसरों के लिए खड़ी हो सके।

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