सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की रहने वाली कोमल इन दिनों श्रद्धा, सेवा और साहस की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। पेशे से EMT (एमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) कोमल जिला सिरमौर की 108 एंबुलेंस सेवा में कार्यरत हैं, लेकिन इस सावन उन्होंने एक खास संकल्प लिया।

300 किलोमीटर का सफर किया तय

कोमल 13 जुलाई को अपने गांव कौलांवालाभूड़ से हरिद्वार के लिए रवाना हुईं। हरिद्वार पहुंचकर उन्होंने गंगाजल से भरी 21 लीटर की कांवड़ उठाई और अब पैदल ही 300 किलोमीटर की दूरी तय कर गांव लौट रही हैं। यह गंगाजल गांव के शिव मंदिर में चढ़ाया जाएगा।

 

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हर दिन तय कर रही 40 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा

कोमल का कहना है कि वे रोज़ाना लगभग 40 किलोमीटर पैदल चलती हैं। इस गति से सफर पूरा करने में उन्हें एक सप्ताह से भी अधिक का समय लग जाएगा। उनके मुताबिक, यह यात्रा उनके लिए सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा, आस्था और आत्मबल का प्रतीक बन गई है।

 

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सेवा में भी रहती हैं आगे, रास्ते में करवा चुकी हैं प्रसव

EMT कोमल न केवल शिवभक्ति में रमी हैं, बल्कि सेवा में भी हमेशा आगे रहती हैं। 108 एंबुलेंस सेवा में काम करते हुए वे कई बार आपातकालीन स्थितियों से जूझ चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने एंबुलेंस में ही एक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया था।

महिला शक्ति का प्रतीक बनीं कोमल

कोमल कहती हैं कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। कांवड़ यात्रा जैसे कठोर तप में भी हमने अपनी आस्था और साहस दिखाया है। यह यात्रा मेरे लिए एक आत्मचिंतन और शक्ति का स्रोत बन चुकी है। वहीं, कोमल की ये यात्रा पूरे प्रदेश में चर्चा  का विषय बनी हुई है। बता दें कि सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का खास महत्व रहता है। हिमाचल और हरियाणा में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए लोग मां गंगा का जल भरकर उनका जलाभिषेक करवाते है। ये जल हरिद्वार, केदारनाथ और अन्य तीर्थ स्थलों से लाया जाता है। 

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