शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई सड़क हादसा या बस सेवा में खामी नहीं, बल्कि टिकट चेकिंग के दौरान एक कंडक्टर और विभागीय इंस्पेक्टर के बीच हुआ विवाद है। शिमला के तारादेवी डिपो से जुड़े इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कंडक्टर ने वीडियो में सुनाई अपनी पूरी आपबीती 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कंडक्टर गीतानंद काफी भावुक नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन उनकी बस में कुल 48 यात्री सवार थे।

 

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बस अपने तय रूट पर चल रही थी और वह लगातार सभी यात्रियों से पूछ रहे थे कि कहीं कोई बिना टिकट तो यात्रा नहीं कर रहा। उनका कहना है कि वह अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभा रहे थे और किसी भी यात्री को बिना टिकट सफर नहीं करने देना चाहते थे।

चेकिंग के दौरान हुआ पूरा विवाद 

गीतानंद के मुताबिक, रास्ते में विभागीय इंस्पेक्टर ने बस को टिकट चेकिंग के लिए रोक लिया। उसी समय एक ऐसा यात्री मिला जो कुछ ही देर पहले बस में चढ़ा था और अभी तक उसका टिकट नहीं बन पाया था।

 

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कंडक्टर का कहना है कि वह उस यात्री का टिकट काटने ही वाले थे, लेकिन उससे पहले ही इंस्पेक्टर ने चेकिंग शुरू कर दी। इसके बावजूद बिना टिकट यात्री पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर डाल दी गई और उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर दी गई।

कंडक्टर बोले- गलती मेरी नहीं थी 

वीडियो में गीतानंद बार-बार यही कहते नजर आए कि उन्होंने अपनी तरफ से कोई लापरवाही नहीं की। उनका कहना है कि अगर कोई यात्री अभी-अभी बस में चढ़ा हो और टिकट बनने से पहले ही चेकिंग शुरू हो जाए, तो उसमें कंडक्टर की क्या गलती हो सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना वजह दोषी बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक गलती उस यात्री की थी जिसने टिकट नहीं लिया था।

 

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यात्रियों ने भी कंडक्टर का किया समर्थन 

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बस में बैठे कई यात्रियों ने भी कंडक्टर का साथ दिया। यात्रियों ने साफ कहा कि कंडक्टर लगातार सभी से टिकट के बारे में पूछ रहे थे और वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति बिना टिकट यात्रा कर रहा था तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। यात्रियों ने इंस्पेक्टर की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि किसी कर्मचारी को बिना पूरी सच्चाई जाने दोषी ठहराना उचित नहीं है।

पुराने मामले का दर्द भी छलका 

वीडियो में गीतानंद ने सिर्फ इस घटना का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि अपने साथ पहले हुई कार्रवाई का दर्द भी साझा किया। उन्होंने बताया कि इससे पहले नेरवा में भी उनके खिलाफ 280 रुपये की एक रिपोर्ट बनाई गई थी।

 

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उनका आरोप है कि वह रिपोर्ट भी गलत थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने उन पर 14 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। इतना ही नहीं, उन्हें नेरवा से सस्पेंड करके तारादेवी डिपो भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि बार-बार इस तरह की कार्रवाई से वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुके हैं।

भावुक होकर बोले- मैं कोई चोर नहीं हूं 

वीडियो में एक समय ऐसा भी आया जब कंडक्टर भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "मैं कोई चोर नहीं हूं, न मैंने कभी चोरी की है और न ही मैं किसी तरह की बेईमानी करता हूं। मैं अपनी नौकरी पूरी ईमानदारी से करता हूं, लेकिन हर बार मुझे ही निशाना बनाया जाता है।" उनकी यह बात सुनकर सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दी।

 

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शिमला से रिकांगपियो जा रही थी बस

जानकारी के अनुसार, यह बस शिमला से किन्नौर के रिकांगपियो जा रही थी। यात्रा के दौरान रास्ते में विभागीय इंस्पेक्टर ने टिकट चेकिंग की। इसी दौरान बिना टिकट यात्री मिलने पर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कंडक्टर ने अपनी बात वीडियो के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं 

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कई लोग कंडक्टर के समर्थन में लिख रहे हैं कि अगर कर्मचारी की कोई गलती नहीं थी तो उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कई लोगों ने HRTC के कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं।

 

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RM ने दिए जांच के आदेश

उधर, तारादेवी डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि वास्तव में गलती किसकी थी और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया की बजाय विभागीय प्रक्रिया अपनाने की सलाह

RM ने यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी को अपनी शिकायत सोशल मीडिया पर डालने के बजाय विभाग के तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों के सामने रखनी चाहिए। उनका कहना है कि विभाग के अंदर शिकायतों के समाधान के लिए उचित व्यवस्था मौजूद है और उसी माध्यम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

 

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पहले की कार्रवाई को बताया सही

क्षेत्रीय प्रबंधक ने यह भी स्पष्ट किया कि नेरवा में कंडक्टर के खिलाफ जो पहले कार्रवाई हुई थी, वह भी पूरी जांच के बाद की गई थी। विभाग ने सभी तथ्यों की जांच करने के बाद ही जुर्माना लगाया था। वहीं अब इस नए मामले की भी निष्पक्ष जांच होगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की नजर विभागीय जांच पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि कंडक्टर के आरोप सही हैं या फिर इंस्पेक्टर की कार्रवाई नियमों के अनुसार थी। तब तक यह मामला सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।