मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में इंतकाल दर्ज करने के बदले कथित तौर पर दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। विजिलेंस जांच के बाद प्रशासन ने आरोपी कानूनगो बंशी लाल और पटवारी अरुण धीमान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले में कथित रूप से शामिल उनके सहायक को भी पद से हटा दिया गया है।

संपत्ति और बैंक रिकॉर्ड खंगाल रही विजिलेंस

विजिलेंस की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। कानूनगो और पटवारी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि उनके सहायक को भी सेवा से हटा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक आगे की कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। मामले की जांच केवल रिश्वत तक सीमित नहीं है।

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विजिलेंस की टीम ने आरोपियों के घरों पर भी छापेमारी कर उनकी चल और अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जुटाए हैं। इसके अलावा बैंक खातों और लॉकर से संबंधित रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए गए हैं। अब जांच एजेंसी आरोपियों की संपत्ति का मूल्यांकन करेगी और यह पता लगाएगी कि उनकी आय के मुकाबले संपत्ति का अनुपात क्या है। यदि जांच में कोई वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

इंतकाल दर्ज करने के बदले मांगे थे दो लाख रुपये

जांच के अनुसार, कोटलु क्षेत्र के रहने वाले पूर्ण चंद ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन का इंतकाल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए कानूनगो और पटवारी ने दो लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि रिश्वत दिए बिना इंतकाल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी।

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बताया जा रहा है कि सौदे की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये लेने के लिए सहायक ललित कुमार को गोहर भेजा गया था। इसी दौरान पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर उसे कथित रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

सेवानिवृत्ति से पहले फंसे कानूनगो

जानकारी के अनुसार, आरोपी कानूनगो बंशी लाल इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सेवानिवृत्ति से पहले ही रिश्वतखोरी के इस मामले में उनका नाम सामने आने के बाद उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई।

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दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद विजिलेंस ने शनिवार को तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। विजिलेंस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जुटाए गए दस्तावेजों व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।