मंडी। हिमाचल प्रदेश में एक सरकारी कर्मचारी को नशा तस्करी करना भारी पड़ गया। इस कर्मचारी को अपनी सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया है। विभाग ने कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। आरोप है कि कर्मचारी नशा तस्करी के मामले में कई महीनों तक पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहाए लेकिन उसने अपनी गिरफ्तारी और जेल में रहने की जानकारी विभाग को नहीं दी। जब विभाग को पूरे मामले का पता चला तो जांच बैठाई गई और गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सरकारी नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

नशा तस्करी में फंसा कर्मचारी

जानकारी के अनुसार जिला मंडी के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत लैब अटेंडेंट के खिलाफ पहले से ही नशा तस्करी से जुड़े मामले में कार्रवाई चल रही थी। जांच के दौरान सामने आया कि कर्मचारी कई महीनों तक पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहा, लेकिन उसने विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं दी। सरकारी सेवा नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी के लिए गिरफ्तारी या हिरासत की सूचना अपने विभाग को देना अनिवार्य होता है। विभाग ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता और सेवा नियमों का उल्लंघन माना।

 

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विभागीय जांच में खुली कई परतें

शिक्षा विभाग ने मामला सामने आने के बाद विस्तृत विभागीय जांच शुरू की। जांच के दौरान न केवल कर्मचारी की गिरफ्तारी और हिरासत की पुष्टि हुई, बल्कि उसके बैंक खाते की भी पड़ताल की गई। जांच में जून 2024 से फरवरी 2025 के बीच बैंक खाते में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला। विभाग ने कर्मचारी से इन रकमों के वैध स्रोत के दस्तावेज मांगे, लेकिन वह संतोषजनक जवाब या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।

तुरंत प्रभाव से सेवा से किया बर्खास्त

विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर उपनिदेशक उच्च शिक्षा (माध्यमिक) मंडी ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए।

 

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शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों से उच्च स्तर की ईमानदारी और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में नशा तस्करी जैसे गंभीर मामले और सेवा नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

बचाव में दी जमानत की दलील

अपने पक्ष में कर्मचारी ने यह तर्क दिया कि उसे उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल आपराधिक मामले के आधार पर नहीं, बल्कि गिरफ्तारी की जानकारी छिपाने, सेवा नियमों के उल्लंघन और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

 

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शिक्षा विभाग का सख्त संदेश

उच्च शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए यदि कोई कर्मचारी नशे जैसे गंभीर अपराधों में कथित रूप से संलिप्त पाया जाता है या सेवा नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों की गरिमा और विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं। ऐसे मामलों में किसी भी कर्मचारी को नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा और भविष्य में भी अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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