मंडी। मंडी में जिला एवं सत्र न्यायालय ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक अहम मामले में ऐसा फैसला सुनाया है, जो महिलाओं के अधिकारों को लेकर मिसाल बन सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी पुरुष के साथ विवाह जैसी स्थिति में लंबे समय तक रह रही है, तो वह घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भरण-पोषण की हकदार होगी, भले ही संबंध कानूनी रूप से पूर्ण विवाह की श्रेणी में न आता हो।
महिला के पक्ष में संरक्षण आदेश जारी
दरअसल, इस मामले में अदालत ने सोलन जिले के कसौली निवासी मान सिंह को निर्देश दिए कि वह अपनी दूसरी पत्नी को हर महीने 7,500 रुपये गुजारा भत्ता और 2,500 रुपये मकान किराया दे। साथ ही अदालत ने महिला के पक्ष में संरक्षण आदेश भी जारी किया।
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मामले के अनुसार, चंद्रवती का पहला पति कई वर्षों तक लापता रहा और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद वह मान सिंह के साथ रहने लगी और दोनों के बीच पारिवारिक संबंध स्थापित हो गए।
महिला की अपील पर सत्र न्यायालय का फैसला
हालांकि पुरुष पहले से शादीशुदा था, फिर भी दोनों ने सामाजिक रूप से विवाह किया और उनका एक बच्चा भी हुआ। समय बीतने के साथ विवाद बढ़ा और महिला को कथित तौर पर घर से निकाल दिया गया।
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पहले निचली अदालत ने केवल बच्चे के भरण-पोषण का आदेश दिया था, लेकिन महिला की अपील पर सत्र न्यायालय ने मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए उसे भी आर्थिक सहायता का अधिकार दिया।
अपने फैसले में अदालत ने कहा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लंबे समय तक साथ रहना और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना इस संबंध को घरेलू संबंध की श्रेणी में लाता है, इसलिए महिला को संरक्षण और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। यह निर्णय उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो विवाह जैसी स्थिति में रहने के बावजूद कानूनी सुरक्षा से वंचित रह जाती हैं।
