शिमला। हिमाचल प्रदेश पहले ही भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। हर बजट, हर आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की कमजोर वित्तीय हालत और बढ़ते कर्ज को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब केंद्र सरकार ने हिमाचल को एक बार फिर विशेष ऋण सहायता जारी की है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार पैसा सख्त शर्तों के साथ आया है और साफ चेतावनी भी कि अगर एक-एक रुपये का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, तो उसकी भरपाई सीधे टैक्स हिस्सेदारी से काटकर की जाएगी।

केंद्र ने जारी की 545 करोड़ 

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश को गति देने के लिए हिमाचल प्रदेश को 545 करोड़ रुपये की विशेष ऋण सहायता जारी की है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह राशि केवल उन्हीं पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च की जा सकेगी, जिन्हें राज्य सरकार ने प्रस्तावित किया है और जिन्हें केंद्र से स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र ने साफ किया है कि इस धनराशि का उपयोग किसी अन्य मद में नहीं किया जा सकता।

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गलत इस्तेमाल हुआ तो टैक्स हिस्से से कटेगा पैसा

वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि यह राशि स्वीकृत उद्देश्य के अलावा किसी अन्य काम में खर्च की गई, तो भविष्य में राज्य को मिलने वाली टैक्स डिवोल्यूशन राशि से सीधे कटौती की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर परियोजनाओं में किसी तरह का बदलाव करना पड़ा, तो उसके लिए पहले भारत सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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10 कार्यदिवस में जारी करनी होगी एजेंसियों को राशि

केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार को यह राशि 10 कार्यदिवस के भीतर संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी करनी होगी। यदि तय समयसीमा में पैसा जारी नहीं किया गया, तो देरी की अवधि पर राज्य सरकार को केंद्र को 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड (ओपन मार्केट लोन) की ब्याज दर से ब्याज चुकाना होगा।

31 मार्च तक खर्च करना अनिवार्य

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि जारी की गई राशि का उपयोग 31 मार्च तक हर हाल में करना होगा। बिना वास्तविक भुगतान के किसी मध्यवर्ती एजेंसी के पास राशि रोककर रखना यानी पार्किंग ऑफ फंड्स व्यय नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति को योजना की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा और उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

56 शहरी निकायों को भी मिले करोड़ों

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत हिमाचल प्रदेश के 56 शहरी निकायों को 88.91 करोड़ रुपये का अनुदान भी जारी किया है। इसमें 35.56 करोड़ रुपये अनटाइड बेसिक ग्रांट और 53.35 करोड़ रुपये टाइड ग्रांट के रूप में दिए गए हैं। अनटाइड ग्रांट का उपयोग शहरी निकाय अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगे, लेकिन इसका इस्तेमाल वेतन या स्थापना व्यय पर नहीं किया जा सकेगा।

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पानी और कचरा प्रबंधन पर खर्च होगी टाइड ग्रांट

टाइड ग्रांट का उपयोग पीने के पानी, वर्षा जल संचयन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर बराबर हिस्से में करना अनिवार्य होगा। केंद्र सरकार ने आदेश दिए हैं कि यह राशि भी 10 कार्यदिवस के भीतर बिना किसी कटौती के सभी शहरी निकायों को जारी की जाए। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि इन फंड्स का उद्देश्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और विकास कार्यों में तेजी लाना है।

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