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January 22, 2026

पंचायत चुनाव पर फिर घमासान : आयोग मांग रहा वोटर लिस्ट, लेट-लतीफी कर रही सुक्खू सरकार!

हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के आदेश दिए हैं

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश सरकार को 28 जनवरी तक पंचायत मतदाता सूचियों का प्रकाशन हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

एक हफ्ते में मतदाता सूची दे सरकार

आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूचियों के सार्वजनिक होने के बाद भी यदि सरकार नई पंचायतों का गठन करना चाहती है, तो इस पर आयोग को कोई आपत्ति नहीं होगी। नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया मतदाता सूची प्रकाशन के समानांतर जारी रह सकती है।

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3548 पंचायतों की सूची तैयार

राज्य में कुल पंचायतों में से 29 पंचायतों को छोड़कर 3548 पंचायतों की मतदाता सूचियां पूरी तरह तैयार कर ली गई हैं। ये सूचियां वर्तमान में उपायुक्तों के पास उपलब्ध हैं और केवल उपायुक्तों के हस्ताक्षर के बाद इन्हें सार्वजनिक डोमेन में जारी किया जाना है।

 

राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने अधिकारियों के साथ हुई बैठक में स्पष्ट किया कि सूची प्रकाशन में किसी भी तरह की देरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

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HC की समयसीमा ने बढ़ाई गंभीरता

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट के सख्त निर्देश भी लागू हैं। अदालत ने 30 अप्रैल से पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। इसके तहत राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को हाईकोर्ट में चुनावी तैयारियों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी है। ऐसे में प्रशासन पर तय समयसीमा में सभी औपचारिकताएं पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

3 करोड़ बैलेट पेपर की छपाई

अब तक तैयार की गई पंचायत मतदाता सूचियों के अनुसार प्रदेश में करीब 56 लाख मतदाता पंचायत चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 3 करोड़ बैलेट पेपर की छपाई पहले ही की जा चुकी है। इससे साफ है कि प्रशासन चुनाव को लेकर ठोस तैयारी कर चुका है।

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स्कूलों में बनेंगे 22 हजार मतदान केंद्र

बैठक में यह भी तय किया गया कि चुनाव से जुड़ी तमाम प्रक्रियाएं स्कूलों की परीक्षाएं समाप्त होने और विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले पूरी की जाएंगी। इसके बाद प्रदेशभर के स्कूलों में करीब 22 हजार मतदान केंद्र (बूथ) स्थापित किए जाएंगे। पंचायत चुनाव के दौरान स्कूल अध्यापकों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी, जबकि करीब 35 हजार कर्मचारियों को चुनावी प्रक्रिया में तैनात किया जाएगा।

कार्यकाल नहीं बढ़ा तो प्रशासक होंगे नियुक्त

बैठक में यह भी साफ किया गया कि जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कानून के तहत बढ़ाया नहीं जा सकता। यदि सरकार इनका कार्यकाल बढ़ाना चाहती है, तो इसके लिए कानून में संशोधन जरूरी होगा। फिलहाल ऐसी स्थिति में इन संस्थाओं में प्रशासकों की नियुक्ति ही एकमात्र विकल्प रहेगा।

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उपायुक्तों को मिलेंगी जिला परिषद की शक्तियां

संक्रमण काल में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए शक्तियों के हस्तांतरण पर भी फैसला लिया गया है। इसके तहत-

  • जिला परिषद की शक्तियां उपायुक्तों के पास रहेंगी
  • पंचायत समिति की शक्तियां बीडीओ के पास होंगी
  • प्रधानों की शक्तियां पंचायत सचिव, पटवारी या अध्यापकों को सौंपी जाएंगी।

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रोस्टर फाइनल होने के बाद आगे की कार्रवाई

राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार से यह भी कहा है कि 28 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन और आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप दिया जाए। इसके बाद आयोग चुनाव की अगली प्रक्रिया को अमल में लाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने दो टूक कहा कि तय समयसीमा के भीतर सभी कदम उठाना अनिवार्य है, ताकि चुनाव निष्पक्ष और समय पर कराए जा सकें।

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