शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले का अब जल्द ही अंतिम फैसला आएगा। हिमाचल हाईकोर्ट ने इस मामले का अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिय है। ऐसे में अब पूरे प्रदेश सहित मासूम युग के परिजनों की निगाहें दोषियों को फांसी दिए जाने का इंतजार कर रही हैं। दरअसल बहुचर्चित युग हत्याकांड में हिमाचल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने दोषियों की फांसी की सजा की पुष्टि और दोष सिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर सोमवार को सुनवाई पूरी कर ली है। अब अदालत का अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है, जिसे लेकर राज्य भर में लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय शिमला द्वारा भेजे गए सजा पुष्टि संदर्भ और दोषियों की अपील दोनों पर संयुक्त रूप से सुनवाई की। यह मामला प्रदेश में उस समय सुर्खियों में आया था जब 4 वर्षीय मासूम युग की निर्मम हत्या ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था।

पड़ोसियों ने ही रची थी साजिश

14 जून 2014 को शिमला के रामबाजार क्षेत्र से युग का अपहरण किया गया था। बाद में सामने आया कि युग को अगवा करने वाले उसके अपने ही पड़ोसी थे चंद्र शर्मा, तेजिंद्र पाल और विक्रांत बख्शी थे। अपहरण के बाद इन दरिंदों ने युग के पिता से 3.5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। फिरौती नहीं मिलने पर उन्होंने युग के शरीर में पत्थर बांध कर उसे जिंदा ही एक जलभराव टैंक में फेंक दिया था। यह टैंक भराड़ी इलाके में स्थित था, जहां से दो साल बाद अगस्त 2016 में युग का कंकाल बरामद हुआ।

 

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जल्दबाजी में नहीं, पर न्याय मिला तेजी से

इस हृदयविदारक घटना की जांच राज्य सीआईडी ने की। 25 अक्टूबर 2016 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई और 20 फरवरी 2017 से मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। इस केस में कुल 135 गवाहों में से 105 ने अदालत में बयान दिए। न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 6 सितंबर 2018 को तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।

न्यायाधीश विरेंद्र सिंह ने इस हत्याकांड को दुर्लभतम में दुर्लभ श्रेणी में रखते हुए फांसी की सजा तय की थी। यह फैसला साढ़े 10 महीनों के भीतर आ गया था, जो न्यायिक प्रक्रिया में अपेक्षाकृत तेज माना जाता है।

 

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राज्यव्यापी जनआक्रोश और न्याय की पुकार

इस घटना के बाद शिमला ही नहीं, पूरे हिमाचल प्रदेश में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। जगह.जगह लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर युग को न्याय दिलाने की मांग की। इस मामले ने कानून व्यवस्था, समाजिक चेतना और मानवता को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर

फिलहाल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने फांसी की सजा की पुष्टि और दोषियों की अपील दोनों पर सुनवाई पूरी कर ली है। अब फैसला सुरक्षित रखा गया है, जिसकी घोषणा आने वाले दिनों में की जाएगी। यह निर्णय केवल युग के परिवार ही नहीं, पूरे समाज के लिए न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

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