शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भरण-पोषण को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर पति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है और इसके बावजूद कोई काम नहीं करता, तो वह पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

महिला ने फैमिली कोर्ट में लगाई थी गुहार

यह मामला मंडी जिले के सरकाघाट की रहने वाली एक महिला से जुड़ा है। महिला ने अपने और बच्चे के खर्च के लिए फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की अर्जी दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी और बच्चे को गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे।

 

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पत्नी को 2,500 और बच्चे को 3,500 रुपये हर महीने

अब इस मामले में हाईकोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पत्नी को हर महीने 2,500 रुपये और नाबालिग बच्चे के लिए 3,500 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने के आदेश दिए हैं।

पति ने कहा- मेरी कमाई सिर्फ 6,100 रुपये है

मामले की सुनवाई के दौरान पति की ओर से दलील दी गई कि उसकी कुल मासिक आय सिर्फ 6,100 रुपये है। उसने भरण-पोषण के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था और इसे लेकर अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला दिया।

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हाईकोर्ट ने पति की याचिका कर दी खारिज

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल यह कहना कि वह अभी काम नहीं कर रहा है, उसे पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।

बाद में बनाए गए प्रमाणपत्रों पर भी कोर्ट ने जताई आपत्ति

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी न्यायिक आदेश को चुनौती देते समय उसकी वैधता उस समय निचली अदालत के सामने मौजूद सामग्री के आधार पर देखी जाती है। कोर्ट ने यह भी माना कि फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद तैयार करवाए गए कुछ प्रमाणपत्र अपने फायदे के लिए बनवाए गए प्रतीत होते हैं।

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पत्नी और बच्चे के लिए तय रकम ज्यादा नहीं

कोर्ट ने कहा कि आज के समय में पत्नी के लिए 2,500 रुपये और बढ़ते हुए बच्चे के लिए 3,500 रुपये प्रति माह की राशि बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए इसे अत्यधिक भरण-पोषण नहीं माना जा सकता।

काम करने में सक्षम पति जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अगर पति या पिता शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन वह कमाने के लिए कोई काम नहीं कर रहा है, तो सिर्फ बेरोजगार होने का बहाना बनाकर पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

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क्या है हाईकोर्ट का अहम संदेश?

इस मामले में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि परिवार की जिम्मेदारी सिर्फ इस वजह से खत्म नहीं हो जाती कि पति फिलहाल कोई काम नहीं कर रहा। अगर वह स्वस्थ है और काम करने में सक्षम है, तो पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाना उसका कर्तव्य है।