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September 10, 2026
हिमाचल हाईकोर्ट का लंबित DA- एरियर पर बड़ा फैसला, सुक्खू सरकार को 6 सप्ताह का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को छह सप्ताह में उचित निर्णय लेने के दिए निर्देश
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों और एरियर का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वहीं, कर्मचारियों के इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश सुक्खू सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों की ओर से लंबित महंगाई भत्ते से जुड़े अभ्यावेदनों पर छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने संदीप कुमार और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने फिलहाल यह फैसला नहीं सुनाया कि कर्मचारी डीए और एरियर के हकदार हैं या नहीं, लेकिन सरकार को उनकी मांगों पर तय समयसीमा में फैसला लेने के लिए बाध्य कर दिया है। इससे लंबे समय से अपने हक के भुगतान का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद जगी है।
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मामला 1 जुलाई 2022 से लंबित महंगाई भत्ते की किस्तों और उसके एरियर से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार की ओर से समय-समय पर जारी कार्यालय ज्ञापनों और आदेशों के आधार पर उन्हें देय तिथियों से डीए का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन इसके बावजूद लंबित राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया।
कर्मचारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार ने 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 को अलग-अलग कार्यालय ज्ञापन जारी किए थे। इन आदेशों के आधार पर कर्मचारियों ने 1 जुलाई 2022 से देय डीए और उसकी लंबित किस्तों के एरियर पर अपना दावा जताया है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, करीब पांच किस्तों का भुगतान और उससे जुड़ा एरियर अभी भी लंबित है। इसी भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखा था।
कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 18 मई 2026 को संबंधित सक्षम अधिकारियों के सामने अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किए थे। लेकिन लंबे समय तक इन अभ्यावेदनों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत के सामने यह तथ्य आया कि कर्मचारियों की ओर से दिए गए अभ्यावेदन अभी भी संबंधित विभागों के पास लंबित हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार और अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अभ्यावेदनों को अनिश्चितकाल तक लंबित न रखा जाए और निर्धारित समय के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए। यही आदेश अब कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत बनकर सामने आया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों के डीए विवाद पर छह सप्ताह की समयसीमा दी है। अदालत ने कहा है कि कर्मचारियों के अभ्यावेदनों पर संबंधित विभाग लागू कानून, सरकारी आदेशों और कार्यालय ज्ञापनों के आधार पर निर्णय लें। सिर्फ निर्णय लेने तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लिए गए निर्णय की जानकारी संबंधित याचिकाकर्ताओं को दी जाए।
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यानी अब सरकार और विभागों को कर्मचारियों की मांग पर औपचारिक और स्पष्ट फैसला करना होगा। अगर जांच और नियमों के आधार पर कर्मचारी 1 जुलाई 2022 से डीए तथा पांच लंबित किस्तों के एरियर के पात्र पाए जाते हैं, तो हाईकोर्ट ने उसी छह सप्ताह की अवधि में देय राशि का भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं।
कर्मचारियों ने अपनी याचिकाओं में राज्य सरकार के कुछ अन्य आदेशों का हवाला देकर कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने सरकार की ओर से जारी 10 अक्तूबर 2024 और फरवरी/मार्च 2026 में जारी अधिसूचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य कर्मचारियों की एक विशेष श्रेणी को उनकी देय तिथियों से केंद्र सरकार की दरों पर महंगाई भत्ता दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब एक विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को देय तिथि से डीए का लाभ दिया जा सकता है, तो उनके मामले में भी लंबित किस्तों और एरियर पर नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए। इसी आधार पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।
अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि उसने मामले के मूल विवाद यानी कर्मचारियों को वास्तव में डीए और एरियर मिलना चाहिए या नहीं, इस पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को ही पहले कर्मचारियों के अभ्यावेदन, सरकारी आदेशों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेने को कहा है।
हालांकि, अदालत की ओर से तय की गई छह सप्ताह की समयसीमा महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब सरकार को कर्मचारियों की मांग पर निश्चित अवधि में कार्रवाई करनी होगी। यदि विभागीय जांच में कर्मचारियों के दावे नियमों के मुताबिक सही पाए जाते हैं, तो लंबित डीए और एरियर का भुगतान भी इसी समयसीमा के भीतर करना होगा।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद लंबे समय से डीए की लंबित किस्तों और एरियर की राह देख रहे कर्मचारियों की उम्मीद बढ़ गई है। कर्मचारियों के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि अब उनके अभ्यावेदन पर फैसला लेने के लिए सरकार के सामने स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है।