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September 10, 2026
शिमला ZP में किसका राज? 2 निर्दलीय बने किंगमेकर, आज होगा कांग्रेस-BJP की किस्मत का फैसला
दो निर्दलीय तय करेंगे किसके सिर सजेगा ताज
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शिमला। 102 दिन से जिस फैसले का इंतजार हो रहा था, उसका दिन आखिरकार आ गया है। हिमाचल प्रदेश की शिमला जिला परिषद को आज अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिल सकते हैं। दोनों पदों के लिए चुनाव वीरवार सुबह 10:30 बजे बचत भवन में होगा।
लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं है। असली मुकाबला जिला परिषद की सत्ता को लेकर है। वजह साफ है- 25 सदस्यों वाली परिषद में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है।
भाजपा के पास 12 निर्वाचित सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के 11। बहुमत का आंकड़ा 13 है। यानी दोनों दलों को सत्ता तक पहुंचने के लिए कम से कम एक और सदस्य का साथ चाहिए। और यहीं से कहानी में एंट्री होती है दो निर्दलीय सदस्यों की।
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का फैसला फिलहाल इन दो निर्दलीयों के रुख पर टिका हुआ है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही निर्दलीय सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहे हैं।
अगर निर्दलीय किसी एक खेमे के साथ चले जाते हैं तो बहुमत का आंकड़ा पूरा हो जाएगा और उसी दल का जिला परिषद पर कब्जा तय हो सकता है। यानी चुनाव से पहले भले ही दोनों दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हों, लेकिन असली तस्वीर मतदान के समय ही साफ होगी।
अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की ओर से सुरेंद्र रेटका को मैदान में उतारे जाने की चर्चा है। वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए पार्टी किसी निर्दलीय चेहरे पर दांव खेल सकती है। दूसरी तरफ भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। पार्टी आखिरी समय में अपने पत्ते खोल सकती है। ऐसे में चुनाव शुरू होने तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
चुनाव से एक दिन पहले भाजपा ने शिमला में जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर रणनीति पर मंथन किया। पार्टी ने अपने सदस्यों को एकजुट रहने और क्रॉस वोटिंग से बचने के निर्देश दिए।
वहीं कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्य मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दिल्ली से लौटने के बाद ओक ओवर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने भी सदस्यों को एकजुट रहने के निर्देश दिए। अब दोनों दलों की सबसे बड़ी नजर उन दो निर्दलीय सदस्यों पर है, जिनका एक-एक वोट पूरा समीकरण बदल सकता है।
शिमला जिला परिषद के सदस्यों का चुनाव 31 मई को हुआ था, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। मामला बाद में हाईकोर्ट तक पहुंचा। अगस्त के पहले सप्ताह में चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी।
मगर उस दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों के सदस्य बैठक से दूर रहे और चुनाव नहीं हो पाया। अब तीसरी बैठक में चुनाव कराया जाना है। नियमों के मुताबिक बैठक के लिए कम से कम 13 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
शिमला जिला परिषद पर लंबे समय से कांग्रेस का प्रभाव रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपना दबदबा कायम रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा के पास पहली बार सत्ता अपने हाथ में लेने का मौका है। संख्या बल में भाजपा एक कदम आगे है, लेकिन बहुमत से अभी भी एक वोट दूर है। कांग्रेस दो वोट पीछे है। इसलिए आज का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।