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September 11, 2026
हिमाचल के सरकारी स्कूलों को मिली नई पहचान...अब वर्दी में स्कूल आएंगे सभी शिक्षक
स्टूडेंट्स, टीचर्स की वर्दी के साथ-साथ भवन का रंग भी तय
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों को एक समान स्वरूप देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। राज्यभर में संचालित 150 CBSE स्कूलों में अब विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म, शिक्षकों के पहनावे और स्कूल भवनों के रंग को लेकर एकरूपता दिखाई देगी। शिक्षा विभाग से जुड़े इन प्रबंधों को लेकर CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया।
सरकार की ओर से तय व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों की स्कूल यूनिफॉर्म में हरे रंग की थीम को प्रमुखता दी जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदेश के CBSE स्कूलों के विद्यार्थियों को एक अलग और समान पहचान देना है। इसी तरह शिक्षकों के लिए भी अलग ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है, ताकि स्कूलों में शिक्षकों का पहनावा औपचारिक और पेशेवर नजर आए।
नई व्यवस्था में महिला शिक्षिकाओं के लिए हल्के लाइलैक यानी बैंगनी रंग की पोशाक निर्धारित की गई है। वहीं पुरुष शिक्षकों को हल्के नीले रंग की शर्ट और पैंट पहननी होगी। सरकार ने शिक्षकों के पहनावे में सादगी और अनुशासन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
ड्रेस कोड में बहुत अधिक सजावटी या अतिरिक्त एक्सेसरीज के इस्तेमाल को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। शिक्षकों का पहनावा ऐसा रखने पर जोर दिया गया है, जो विद्यालय के वातावरण के अनुरूप मर्यादित, साफ-सुथरा और कार्यस्थल के लिहाज से उपयुक्त हो। इसके साथ ही स्कूल में ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को अपना पहचान पत्र भी पहनना आवश्यक होगा।
सरकार ने केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों की यूनिफॉर्म तक ही बदलाव सीमित नहीं रखा है। CBSE स्कूलों के भवनों को भी एक समान स्वरूप देने के लिए रंगों का चयन किया गया है। स्कूल भवनों की बाहरी रंग योजना में ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंगों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस निर्णय के पीछे स्कूलों को एक अलग और समान दृश्य पहचान देने का उद्देश्य माना जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में बने स्कूल भवनों के बावजूद रंग योजना समान रहने से प्रदेश के CBSE स्कूलों को एक साझा पहचान मिल सकेगी।
सरकार ने शिक्षकों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड को लागू करने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता देने का भी फैसला किया है। शिक्षकों को नई ड्रेस खरीदने के लिए एकमुश्त 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
निर्धारित ड्रेस कोड इस वर्ष 1 अक्तूबर से अनिवार्य किया जाना है। इससे शिक्षकों को नई यूनिफॉर्म तैयार करवाने या खरीदने में आर्थिक सुविधा मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि निर्धारित पोशाक को लागू करते समय शिक्षकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
CBSE स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रदेश के 150 स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति को दिन में तीन अलग-अलग समय पर दर्ज किया जाएगा।
पहली बार स्कूल पहुंचने के समय हाजिरी लगेगी। इसके बाद लंच ब्रेक के दौरान दूसरी उपस्थिति दर्ज की जाएगी और स्कूल की छुट्टी के समय तीसरी बार उपस्थिति दर्ज होगी। इस व्यवस्था के जरिए स्कूल में शिक्षकों की मौजूदगी और कार्य अवधि की बेहतर निगरानी करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार के अनुसार CBSE स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 1,200 शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। आने वाले समय में आवश्यकता के अनुसार और शिक्षकों की भर्ती किए जाने की बात कही गई है।
शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के साथ सरकार इन स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके घर के आसपास बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने के लिए दूर न जाना पड़े।
बैठक में CBSE स्कूलों में आधारभूत ढांचे को विकसित करने और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के लिए सुविधाओं में सुधार को लेकर वित्तीय प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से इन स्कूलों के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का फोकस स्कूल भवनों, आवश्यक सुविधाओं और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने पर है। CBSE प्रणाली के तहत संचालित इन स्कूलों को मजबूत करने के पीछे उद्देश्य प्रदेश के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध करवाना है।
CM सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में विद्यार्थियों को उनके घर के आसपास बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाना शामिल है। सरकार CBSE स्कूलों में जरूरी संसाधन और सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और वहां कार्यरत शिक्षकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सरकार का मानना है कि बेहतर आधारभूत ढांचा, पर्याप्त शिक्षक और व्यवस्थित स्कूल वातावरण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विधायक सुरेश कुमार, चंद्र शेखर और नीरज नैय्यर के अलावा हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह मौजूद रहे। शिक्षा सचिव राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।