चंबा। पति की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी तो मिल गई, लेकिन नियमित कर्मचारी बनने का सपना एक ऐसी शर्त पर अटक गया- जिसे पूरा करना एक विधवा महिला के लिए लगभग असंभव था। छोटे बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच महिला ने 300 किलोमीटर दूर जाकर नौकरी करने से इनकार कर दिया।

पति की मौ.त के बाद मिली नौकरी

इसका खामियाजा उसे चार साल तक भुगतना पड़ा। अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी महिला कर्मचारी की पारिवारिक मजबूरियों को उसके अधिकार छीनने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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300 किलोमीटर दूर भेजने की रखी थी शर्त

मामला चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी की रहने वाली नोरात्रु देवी का है। उनके पति लेख राम हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम में दैनिकभोगी चौकीदार थे। वर्ष 1996 में उनके निधन के बाद जनवरी 1999 में नोरात्रु देवी को अनुकंपा के आधार पर दैनिकभोगी चौकीदार की नौकरी दी गई।

पांगी से बिलासपुर भेजने की थी तैयारी

वर्ष 2011 में विभाग ने उनके नियमितीकरण की पेशकश की, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें पांगी छोड़कर नाहन या बिलासपुर स्थित रेजिन एंड टरपेन्टाइन फैक्ट्री में अनस्किल्ड वर्कर के रूप में कार्यभार संभालना होगा। नोरात्रु देवी ने छोटे बच्चों की देखभाल और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए इतनी दूर जाने में असमर्थता जताई। इसके बाद विभाग ने उन्हें नियमित नहीं किया।

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चार साल बाद मिली नियमित नौकरी

विभाग ने बाद में अगस्त 2015 में उन्हें पांगी में ही चपरासी के पद पर नियमित किया। इसके बाद नोरात्रु देवी ने नियमितीकरण में हुई देरी को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने कहा कि एक विधवा और चतुर्थ श्रेणी की महिला कर्मचारी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अपने छोटे बच्चों को छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर नौकरी करने चली जाए। अदालत ने यह भी माना कि पांगी जैसे दुर्गम और बर्फबारी वाले क्षेत्र में जहां कई कर्मचारी तैनाती से बचते हैं, वहीं याचिकाकर्ता वहां सेवा देने के लिए तैयार थीं।

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वरिष्ठता का अधिकार नहीं छीन सकते

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि नोरात्रु देवी को जुलाई 2011 से काल्पनिक (Notional) आधार पर नियमित माना जाए, क्योंकि उसी समय उनके साथ कार्यरत अन्य कर्मचारियों का भी नियमितीकरण हुआ था। हालांकि वर्ष 2011 से 2015 तक का वास्तविक वेतन नहीं मिलेगा, लेकिन उनकी वरिष्ठता और नियमितीकरण से जुड़े सभी अन्य सेवा लाभ सुरक्षित रहेंगे।

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