शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र के सबसे छोटे लेकिन सबसे महत्वपूर्ण उत्सव पंचायत चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। जहां एक ओर राज्य निर्वाचन आयोग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने अपने सख्त तेवरों से आयोग की चिंता बढ़ा दी है। चुनावी व्यवस्था के बीच हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) और राज्य चुनाव आयोग के बीच बसों की बुकिंग को लेकर नया पेच फंस गया है।

आयोग ने निगम से मांगी 400 बसें

दरअसल चुनावी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आयोग ने निगम से 400 बसों की मांग की थी, लेकिन आर्थिक तंगी और भारी घाटे से जूझ रहे एचआरटीसी प्रबंधन ने दो टूक कह दिया है कि बुकिंग तभी पक्की होगी जब आयोग कुल राशि का 50 प्रतिशत एडवांस भुगतान करेगा। निगम प्रबंधन ने इसके पीछे बदले गए नियमों और विभाग की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला दिया है।

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चुनावी ड्यूटी के लिए मांगी गईं सैकड़ों बसें

प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में करवाए जाने हैं। ऐसे में मतदान कर्मियों, सुरक्षा बलों और चुनावी सामग्री को दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग को बड़ी संख्या में बसों की जरूरत पड़ रही है। आयोग ने एचआरटीसी से करीब 400 बसों की मांग करते हुए यह भी कहा है कि चुनावी ड्यूटी पर भेजी जाने वाली बसें बेहतर स्थिति में होनी चाहिए, ताकि रास्ते में किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न आए।

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जानकारी के अनुसार पहले चरण के मतदान के लिए पोलिंग पार्टियों को 24 और 25 मई को रवाना किया जाएगा, जबकि मतदान 26 मई को होगा। इसके बाद मत पेटियों और कर्मचारियों को वापस लाने के लिए भी इन्हीं बसों का इस्तेमाल किया जाएगा।

घाटे से जूझ रहे निगम ने सख्त किए नियम

निगम अधिकारियों ने चुनाव आयोग को स्पष्ट कर दिया है कि बसों की बुकिंग तभी संभव होगी, जब कुल भुगतान का आधा हिस्सा अग्रिम रूप से जमा करवाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 400 बसों की बुकिंग पर करीब सात करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, ऐसे में निगम ने आयोग से लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये एडवांस जमा करवाने को कहा है।

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निगम प्रबंधन का कहना है कि पहले चुनावों और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान बसें तो भेज दी जाती थीं, लेकिन भुगतान महीनों तक लंबित रहता था। जिसके चलते घाटे में चल रहे विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता गया।  प्रबंधन ने आयोग को 3 नवंबर 2024 को लागू किए गए नए नियमों का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम, रैली या चुनावी ड्यूटी के लिए 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान अनिवार्य है। ऐसे में निगम प्रबंधन ने आयोग के सामने भी 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान की शर्त रख दी है।

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आम जनता की बढ़ेंगी परेशानियां

एक साथ 400 बसों के चुनावी कार्य में लगाए जाने से प्रदेश के कई रूट प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। एचआरटीसी पहले ही बसों और चालकों की कमी से जूझ रहा है। कई क्षेत्रों में सीमित बस सेवाएं चल रही हैं और अक्सर तकनीकी खराबियों के कारण रूट बाधित हो जाते हैं। ऐसे में चुनावी ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में बसों के हटने से आम यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव

प्रदेश की 3754 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, पंचायत सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद के कुल 31182 पदों के लिए चुनाव कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 26 मई, दूसरे चरण का 28 मई और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होगा। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन मतगणना भी करवाई जाएगी और कई पदों के परिणाम तुरंत घोषित कर दिए जाएंगे।

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