शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से चल रही डेपुटेशन व्यवस्था पर अब सख्ती शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्मिक विभाग ने विभिन्न विभागों में चल रहे डेपुटेशन समाप्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद ऐसे कर्मचारी, जो लंबे समय से अपनी मूल पोस्टिंग से अलग स्थानों पर सेवाएं दे रहे थे, अब संबंधित मूल कार्यालयों और संस्थानों में लौटने लगे हैं।

हार्ड और ट्राइबल क्षेत्रों में लौटेंगे कर्मचारी

डेपुटेशन व्यवस्था का सबसे सीधा असर उन क्षेत्रों में देखने को मिलेगा, जहां कर्मचारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। खासकर कठिन और जनजातीय क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के दूसरे स्थानों पर काम करने के कारण मूल संस्थानों में पद खाली रह जाते थे।

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अब मूल तैनाती बहाल होने से इन क्षेत्रों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्कूलों, कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में प्रभावित हो रही सेवाओं को कुछ राहत मिल सकती है।

शिक्षा निदेशालय से करीब 20 कर्मचारी वापस

डेपुटेशन खत्म करने की प्रक्रिया में शिक्षा विभाग में भी कार्रवाई शुरू हो गई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय, शिमला में लंबे समय से डेपुटेशन पर काम कर रहे करीब 20 कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थलों के लिए वापस भेजा गया है।

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एक साथ कर्मचारियों की वापसी से निदेशालय के कामकाज पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है। अब विभाग को यह देखना होगा कि जिन कार्यालयों में डेपुटेशन के जरिए अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध था, वहां वास्तव में कितने पदों की आवश्यकता है और स्वीकृत पदों की स्थिति क्या है।

वेतन बिल में अब DDO की भूमिका अहम

डेपुटेशन खत्म करने के साथ वेतन भुगतान की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण जवाबदेही तय की गई है। अब Drawing and Disbursing Officer यानी DDO को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी ने जिस स्टेशन से वेतन प्राप्त किया है, उसी स्थान पर निर्धारित अवधि में वास्तव में ड्यूटी की है।

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इस प्रमाणन के आधार पर ही वेतन बिल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। गलत जानकारी या गलत प्रमाणन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होने का प्रावधान किया गया है।

सर्विस बुक में भी दर्ज होगा पूरा रिकॉर्ड

नई व्यवस्था में कर्मचारी की सर्विस बुक में तैनाती से संबंधित रिकॉर्ड को भी व्यवस्थित रखना जरूरी होगा। इसमें मूल नियुक्ति स्थल के साथ डेपुटेशन अथवा स्थान परिवर्तन का विवरण दर्ज किया जाएगा।

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इससे कर्मचारी की कागजी तैनाती और वास्तविक कार्यस्थल के बीच अंतर की स्थिति को पकड़ना आसान होगा। साथ ही भविष्य में सेवा संबंधी रिकॉर्ड की जांच के दौरान भी पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

स्टाफ का होगा नए सिरे से आकलन

डेपुटेशन समाप्त होने के बाद अब विभागों के सामने मानव संसाधन का पुनर्मूल्यांकन करने की चुनौती भी होगी। मूल स्थानों पर कर्मचारियों की वापसी से जहां दुर्गम क्षेत्रों में रिक्तियां कम हो सकती हैं, वहीं निदेशालयों और उन कार्यालयों में स्टाफ की कमी उभर सकती है जहां डेपुटेशन कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत थे।

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