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November 3, 2026

हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : अब पुरानी बसों में नहीं बैठेंगे स्कूली बच्चे, निजी स्कूलों को झटका

हाईकोर्ट ने 15 साल की आयु सीमा को बताया सही

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Himachal Pradesh news

शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अब 15 साल से ज्यादा पुरानी बसों और शिक्षण संस्थानों के वाहनों का इस्तेमाल बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए नहीं किया जा सकेगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस नियम को सही ठहराते हुए निजी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की ओर से दायर 21 याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने 15 साल की आयु सीमा को बताया सही

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूली बसों और शिक्षण संस्थानों के वाहनों की अधिकतम उम्र 15 साल तय करने के राज्य सरकार के फैसले को वैध माना है। अदालत ने साफ कहा कि 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को स्कूल के बच्चों को लाने और ले जाने के काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

 

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इस नियम को चुनौती देते हुए निजी स्कूलों, नर्सिंग और फार्मेसी संस्थानों ने अदालत में याचिकाएं दायर की थीं। इन सभी 21 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने फैसला सुनाया।

2018 में सरकार ने बनाया था यह नियम

दरअसल, हिमाचल प्रदेश सरकार ने 12 अक्तूबर 2018 को मोटर वाहन नियम, 1999 में बदलाव किया था। इसके तहत नियम 73-ए जोड़ा गया था। इस नियम में साफ किया गया था कि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में बच्चों व विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन 15 साल से ज्यादा पुराने नहीं होने चाहिए। निजी स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों ने इसी नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

 

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स्कूलों ने क्या दी थी दलील?

याचिकाकर्ता स्कूलों और संस्थानों का कहना था कि किसी वाहन की अधिकतम उम्र तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 59 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस तरह से वाहनों की उम्र तय नहीं कर सकती। उनका यह भी कहना था कि किसी बस या वाहन को केवल उसकी उम्र के आधार पर स्कूल ड्यूटी से नहीं हटाना चाहिए, बल्कि उसकी फिटनेस देखकर फैसला लिया जाना चाहिए। अगर वाहन चलाने की स्थिति में है तो उसे इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने खारिज की सभी दलीलें

हाईकोर्ट ने स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम की धारा 59 के तहत किसी वाहन की कुल उम्र तय कर सकती है।

 

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वहीं, हिमाचल सरकार का नियम केवल यह तय करता है कि कितनी उम्र तक के वाहन बच्चों को लाने-ले जाने के काम में लगाए जा सकते हैं। यानी 15 साल से पुराने वाहन पूरी तरह बेकार नहीं होंगे, बल्कि उनका दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने माना कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए राज्य सरकार का यह फैसला पूरी तरह कानूनी है।

नर्सिंग और फार्मेसी संस्थान भी नियम के दायरे में

अदालत ने यह भी साफ किया कि इस नियम में स्कूल शब्द का मतलब केवल दसवीं या बारहवीं तक पढ़ाई करवाने वाले स्कूलों से नहीं है। इसके दायरे में नर्सिंग, फार्मेसी और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थान भी आते हैं। यानी जो भी शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध करवाते हैं, उन्हें इस नियम का पालन करना होगा।

 

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नूरपुर स्कूल बस हादसे के बाद बनाया गया था नियम

राज्य सरकार ने अदालत में बताया कि यह नियम 9 अप्रैल 2018 को कांगड़ा जिले के नूरपुर में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसे के बाद बनाया गया था। इस हादसे में 23 बच्चों समेत कुल 27 लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जरूरी सुझाव दिए थे। इसके बाद जनता से भी सुझाव लिए गए और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूली वाहनों की अधिकतम उम्र 15 साल तय करने का फैसला लिया गया था। अब हाईकोर्ट ने भी सरकार के इस फैसले को सही ठहरा दिया है।

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