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November 5, 2026
हाईकोर्ट की चेतावनी -अकाउंट बहाल नहीं किए तो देगा पड़ेगा मुआवजा

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने उन आवाजों को बंद करवा दिया था, जो सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आग उगलती थी। सुक्खू सरकार के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद करने वाले पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और सुक्खू सरकार में कैबिनेट मंत्री चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती सहित बलदेव कुमार उर्फ बंटी सिराजी और पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा के फेसबुक अकाउंट बंद करवा दिए थे। अब इस मामले में सुक्खू सरकार को हिमाचल हाईकोर्ट से कड़ी फटकार लगी है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने फेसबुक अकाउंट बंद करवाने के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकार किसी भी व्यक्ति का सोशल मीडिया अकाउंट बिना ठोस तथ्यों और कानूनी आधार के मनमाने तरीके से बंद नहीं करवा सकती। इतना ही नहीं, अदालत ने सरकार को संबंधित फेसबुक अकाउंट बहाल करने के संबंध में निर्णय लेने को कहा है। यदि अकाउंट बहाल नहीं किए गए तो सरकार पर मुआवजा लगाने का आदेश भी दिया जा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवाने की कार्रवाई को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नीरज भारती सहित तीन लोगों के फेसबुक अकाउंट बंद होने से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति भूपेश शर्मा की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने अकाउंट बंद करवाने के पीछे मौजूद आधार और तथ्यों को लेकर सरकार से सवाल किए। पीठ ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया पर मौजूदगी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मनमाने तरीके से प्रभावित नहीं किया जा सकता। सरकार को संबंधित अकाउंट की बहाली पर फैसला लेने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अकाउंट बहाल नहीं किए गए तो प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का आदेश पारित किया जा सकता है।
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पूर्व CPS नीरज भारती हिमाचल की राजनीति में सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। वह समय-समय पर प्रदेश सरकार की नीतियों, फैसलों और योजनाओं को लेकर फेसबुक के माध्यम से सवाल उठाते रहे हैं। मौजूदा सुक्खू सरकार के कई फैसलों पर भी नीरज भारती ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद सरकार ने उनका फेसबुक अकाउंट बंद करवा दिया था। नीरज भारती ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस मामले में पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा और बलदेव कुमार उर्फ बंटी सिराजी के फेसबुक अकाउंट बंद होने का मुद्दा भी अदालत के सामने पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार के कहने पर मेटा ने उनके फेसबुक अकाउंट बंद किए हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने और उसकी नीतियों पर सवाल खड़े करने वालों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवाए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए अपने फेसबुक अकाउंट जल्द बहाल करवाने की मांग की है।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी व्यक्ति का फेसबुक अकाउंट बंद करवाने के लिए ठोस तथ्य और उचित कानूनी आधार होना जरूरी है। केवल किसी की टिप्पणियों या विचारों से असहमति के आधार पर सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवाने की कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती। अदालत ने सरकार को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने और अकाउंट बहाली पर निर्णय लेने को कहा है। यदि प्रभावित लोगों के अकाउंट बहाल नहीं होते हैं तो सरकार को मुआवजे के रूप में आर्थिक जिम्मेदारी भी उठानी पड़ सकती है।
मामले की सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। अदालत को रजिस्ट्री की रिपोर्ट के माध्यम से बताया गया कि फेसबुक की मूल कंपनी मेटा को जिस पते पर नोटिस भेजा गया था, वहां कंपनी नहीं मिली। इस कारण नोटिस की तामील नहीं हो सकी। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दो दिन के भीतर मेटा कंपनी का सही पता अदालत में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सही पता मिलने के बाद कंपनी को नए सिरे से नोटिस जारी किया जाएगा, ताकि मामले में उसका पक्ष भी सुना जा सके।
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हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार फेसबुक अकाउंट बहाल करने को लेकर क्या फैसला लेती है और मेटा कंपनी इस पूरे मामले में क्या पक्ष रखती है। फिलहाल हाईकोर्ट की मुआवजे संबंधी चेतावनी ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब अगली सुनवाई में सरकार के रुख और अकाउंट बहाली को लेकर होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।