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November 3, 2026

SPG छोड़ कर राजनीति में आए थे नंदलाल, सीधे दिल्ली से मिला था टिकट; वीरभद्र के थे करीबी

वीरभद्र के करीबी थे नंदलाल, कई अहम पदों पर निभा चुके थे जिम्मेदारियां

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MLA Nand Lal

शिमला। देश के प्रधानमंत्री और गांधी परिवार की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एक जांबाज सुरक्षा अधिकारी से हिमाचल की राजनीति के मजबूत चेहरे तक का सफर तय करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं रामपुर के चार बार के विधायक नंद लाल का मंगलवार को निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे नंद लाल ने तीन नवंबर की सुबह करीब साढ़े पांच बजे शिमला के अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना में अंतिम सांस ली। उनके निधन से हिमाचल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।

 

नंद लाल की पहचान केवल एक विधायक के रूप में नहीं थी, बल्कि वह उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा एजेंसियों में सेवाएं देने के बाद राजनीति में कदम रखा और लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की।

एसपीजी में रहते पीएम की सुरक्षा का संभाला था जिम्मा

नंद लाल का राजनीतिक जीवन शुरू होने से पहले सुरक्षा बलों में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में सेवाएं देने के बाद वर्ष 1985 में उनका चयन विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में हुआ। उन्होंने वर्ष 1985 से 1997 तक करीब 12 वर्षों तक SPG में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर सोनिया गांधी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। 

 

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सीधे दिल्ली हाईकमान से मिला था टिकट

करीब 22 वर्षों तक ITBP में सेवाएं देने के बाद नंद लाल ने वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में कदम रखा। गांधी परिवार की सुरक्षा से जुड़े उनके अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान के चलते कांग्रेस में उनकी एंट्री भी खास रही। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से उनके चुनाव लड़ने का रास्ता दिल्ली हाईकमान के स्तर पर साफ हुआ और उन्हें कांग्रेस का टिकट मिला। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान में उतरकर अपनी पहली ही पारी में जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी बृज लाल को 6,470 मतों से हराकर विधानसभा तक का सफर तय किया।

 

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पहली जीत के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा

वर्ष 2007 में पहली बार विधायक बनने के बाद नंद लाल ने रामपुर की राजनीति में लगातार अपनी पकड़ मजबूत की। वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार चार बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक चुने गए। वर्ष 2022 के चुनाव में भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी कौल सिंह नेगी को 567 मतों के करीबी अंतर से पराजित किया था। सुरक्षा बलों में अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ काम करने का अनुभव उनकी राजनीतिक यात्रा में भी दिखाई दिया और उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में होती थी गिनती

नंद लाल को हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता था। वीरभद्र सिंह सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव (CPS) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अलावा वह विधानसभा की विभिन्न समितियों से भी जुड़े रहे। वर्ष 2022 में चौथी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके अतिरिक्त उन्हें लाडा कमेटी की अध्यक्षता की जिम्मेदारी भी मिली थी।

 

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विधायक से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष तक पहुंचा सफ़र

विधानसभा पहुंचने के बाद वीरभद्र सिंह की सरकार में नंदलाल को वर्ष 2013 से 2017 तक मुख्य संसदीय सचिव कि ज़िम्मेदारी मिली। उन्होंने विधानसभा कि अलग.अलग समितियों में भी काम किया। इसके बाद सुक्खू सरकार में मार्च 2024 में उन्हें प्रदेश सरकार ने सातवे राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। 

सुक्खू सरकार ने क्यों बनाया था वित आयोग का अध्यक्ष

बताया जाता है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा ज्वाइन की थी, तब सुक्खू सरकार को डर था कि कहीं नंदलाल भी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा ज्वाइन ना कर लें, क्योंकि भाजपा में जाने वाले सभी कांग्रेस विधायक वीरभद्र गुट के थे और नंदलाल भी वीरभद्र परिवार के करीबी माने जाते थे। ऐसे में नंदलाल को अपने पाले में डालने के लिए सुक्खू सरकार ने उन्हें वित आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

 

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देवठी गांव में हुआ था जन्म, राजनीति विज्ञान में की थी MA

नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को शिमला जिले के रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन ITBP में हुआ और प्रशिक्षण के बाद वह कमांडो दस्ते का हिस्सा बने। अपनी सेवाओं के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में DIG स्तर के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में नई पारी शुरू की।

कांग्रेस कार्यालय में अंतिम दर्शन, देवठी में होगा अंतिम संस्कार

नंद लाल की पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए शिमला स्थित कांग्रेस कार्यालय लाया गया, जहां पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव देह को उनके गृह क्षेत्र रामपुर ले जाने की तैयारी की गई। बुधवार को उनके पैतृक गांव देवठी में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके परिवार में पत्नी, बेटा, बहू और सात वर्षीय पोता हैं।

 

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नंद लाल के निधन पर लवी मेले की गतिविधियां स्थगित

रामपुर के लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के दौरान विधायक नंद लाल के निधन की खबर से शोक का माहौल है। प्रशासन ने उनके सम्मान में तीन और चार नवंबर को मेले की सभी गतिविधियां स्थगित करने का निर्णय लिया है। रामपुर के लोगों के लिए नंद लाल का जाना एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक क्षति माना जा रहा है। देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाने वाले नंद लाल का जीवन सुरक्षा, समर्पण और लगातार चार चुनावी जीत के लिए याद किया जाएगा।

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