शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का बहुप्रतीक्षित ड्रीम प्रोजेक्ट अब हकीकत की ओर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। पहाड़ों की रानी शिमला को जाम के झंझट से मुक्ति दिलाने और सूबे के बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का ड्रीम प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरने को तैयार है।

ADB की मिली मंजूरी 

हिमाचल प्रदेश की तस्वीर बदलने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘स्ट्राइड’ (STRIDE) को एशियन डिवेलपमेंट बैंक (ADB) ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। विश्व बैंक स्तर की इस वित्तीय संस्था की मंजूरी के बाद अब प्रदेश में विकास की एक नई इबारत लिखी जाएगी।

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एडीबी की स्कोपिंग मिशन टीम तीन दिनों तक हिमाचल प्रदेश के दौरे पर रही, जहां उन्होंने जमीनी हकीकत को परखने के लिए प्रस्तावित कार्य स्थलों (साइट्स) का विस्तृत विजिट किया। टीम के इस दौरे के बाद अब जल्द ही धरातल पर काम शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। जिससे आने वाले वर्षों में हिमाचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की उम्मीद बढ़ गई है।

कौन कौन से प्रोजेक्ट्स पर होगा काम

राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत शिमला में अत्याधुनिक केबल स्टे ब्रिज, फ्लाईओवर, नई डबल लेन टनल और महत्वपूर्ण सड़कों के विस्तार जैसे बड़े विकास कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना का उद्देश्य राजधानी शिमला में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और लोगों को आधुनिक परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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एडीबी टीम ने परियोजना का किया गहन अध्ययन

एशियन डिवेलपमेंट बैंक की स्कोपिंग मिशन टीम हाल ही में तीन दिवसीय दौरे पर हिमाचल प्रदेश पहुंची थी। इस दौरान टीम ने परियोजना से जुड़ी विभिन्न साइटों का निरीक्षण किया और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की व्यवहारिकता का आकलन किया। टीम ने न केवल परियोजना स्थलों का दौरा किया, बल्कि प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कई दौर की बैठकों में भी हिस्सा लिया। इन बैठकों में परियोजना की आवश्यकता, संभावनाओं, तकनीकी पहलुओं और भविष्य में होने वाले लाभों पर विस्तृत चर्चा की गई। 

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शिमला को मिलेगा नया पहचान चिन्ह

परियोजना के सबसे आकर्षक हिस्सों में शिमला शहर में प्रस्तावित आइकॉनिक केबल स्टे ब्रिज शामिल है। यह पुल रेलवे क्रॉसिंग क्षेत्र को पर्यटन निगम के होटल होलीडे होम से जोड़ेगा। आधुनिक तकनीक और आकर्षक डिजाइन पर आधारित यह पुल न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगा, बल्कि शिमला की नई पहचान के रूप में भी उभरेगा। माना जा रहा है कि यह संरचना पर्यटन के लिहाज से भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

टॉलैंड से आईजीएमसी तक बनेगी आधुनिक डबल लेन टनल

यातायात जाम की समस्या से जूझ रहे शिमला शहर को राहत देने के लिए टॉलैंड से आईजीएमसी अस्पताल तक डबल लेन टनल निर्माण का भी प्रस्ताव है। इस टनल के निर्माण से शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और लोगों को कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। एडीबी टीम ने इस प्रस्तावित टनल को लेकर भी विस्तृत चर्चा की और तकनीकी सुझाव दिए हैं।

 

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2200 करोड़ रुपये की परियोजना से होगा बड़ा बदलाव

राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई इस परियोजना की कुल लागत लगभग 2200 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें से करीब 1689 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता एशियन डिवेलपमेंट बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। परियोजना के तहत केवल शिमला ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सड़क और परिवहन ढांचे को मजबूत करने की योजना है। सीमावर्ती क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सड़कों को डबल लेन बनाने का भी प्रावधान इसमें शामिल है।

औपचारिकताएं पूरी होते ही शुरू हो सकता है काम

परियोजना को लेकर अब केवल दस्तावेजी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शेष बची हैं। आगामी समय में एडीबी की टीम नियमित अंतराल पर हिमाचल का दौरा कर परियोजना की प्रगति पर नजर रखेगी। सरकारी सूत्रों का मानना है कि यदि सभी औपचारिकताएं तय समय में पूरी हो जाती हैं तो इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू हो सकता है। इससे न केवल प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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हिमाचल के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रदेश के विकास के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। केबल ब्रिज, फ्लाईओवर, टनल और आधुनिक सड़क नेटवर्क जैसे प्रोजेक्ट हिमाचल को नई पहचान देने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और यातायात व्यवस्था को भी नई दिशा देंगे। यदि यह परियोजना तय समय में धरातल पर उतरती है तो आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश आधुनिक आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में देश के अग्रणी पहाड़ी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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