मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के तहत आती सराज घाटी में आई प्राकृतिक आपदा ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश और बादल फटने से आई बाढ़ ने न केवल लोगों के घर और जीवन बर्बाद किए, बल्कि संचार और यातायात की हर सुविधा को भी ठप कर दिया है। लेकिन इस त्रासदी के बीच इंसानियत और साहस की जो मिसाल सामने आई है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।
तेज बहाव में फिसल कर बह गए थे
बतौर रिपोर्टर्स, मंडी जिला के थुनाग उपमंडल के निहरी गांव निवासी 55 वर्षीय बिशन सिंह आपदा के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका घर परवैड में बाखली खड्ड के किनारे स्थित है, जहां 30 जून की रात भयंकर बाढ़ आई।
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पानी के तेज बहाव में वे फिसल कर बह गए, लेकिन किस्मत से एक पेड़ की टहनी पकड़ने में सफल रहे। उनका परिवार भी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। भारी प्रयास के बाद परिजनों ने उन्हें दलदल से बाहर निकाला।
30 से 35 लोगों ने पहुंचाया अस्पताल
जैसे ही मौसम कुछ साफ हुआ, गांव के 30 से 35 लोग एकजुट हुए। उन्होंने कुर्सी को पालकी का रूप देकर बिशन सिंह को कंधों पर उठाया और करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर बगस्याड पहुंचे। यहां से एक निजी गाड़ी में उन्हें मंडी के जोनल अस्पताल ले जाया गया, जहां अब उनका इलाज चल रहा है। जांच में पता चला है कि बिशन सिंह की टांग टूट चुकी है।
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रातभर खुले आसमान के नीचे सहते रहे दर्द
रातभर बिशन सिंह खुले आसमान के नीचे, बारिश के बीच दर्द सहते रहे। अगले दिन जब पानी का स्तर कुछ कम हुआ तो वे परिवार सहित निहरी स्थित पुराने मकान में पहुंचे। संचार और सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट चुका था, बिजली नहीं थी, मदद के लिए कोई रास्ता नहीं था। वहीं, बिशन सिंह के बेटे पारस ने बताया कि लगातार दो दिन तक गांव में स्थानीय स्तर पर दर्द की दवा दी गई, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
