बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब यह मामला बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत कपाहड़ा तक पहुंच गया है, जहां स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करने पर विद्युत विभाग ने पंचायत प्रधान विनय कुमार शर्मा के घर का बिजली कनेक्शन काट दिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है। पंचायत प्रधान ने कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे मनमाना कदम करार दिया है। वहीं, विद्युत विभाग का कहना है कि कनेक्शन काटने की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है।

 

स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही इस खींचतान ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ बिजली विभाग स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ पंचायत प्रधान ने ग्राम सभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। प्रधान ने यहां तक चेतावनी दे दी है कि उनकी निजी जमीन पर लगे बिजली के खंभे और तार 24 घंटे के भीतर हटाए जाएं। इससे मामला केवल स्मार्ट मीटर लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब विभाग और पंचायत प्रधान के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

 

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यह फरमान तो ब्रिटिश हुकूमत को भी पीछे छोड़ गया

पंचायत प्रधान विनय कुमार शर्मा ने अपने घर का बिजली कनेक्शन काटे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर नहीं लगवाने पर बिजली काटने की कार्रवाई बेहद कठोर है। प्रधान ने तंज कसते हुए कहा कि विभाग का यह फरमान तो ब्रिटिश हुकूमत को भी पीछे छोड़ गया।

 

प्रधान का आरोप है कि स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की आशंकाओं को दूर करने के बजाय उन पर इन्हें लगवाने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि जब ग्राम सभा में इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जा चुका था और उसे विभागीय अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया था, तो उसके बावजूद इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई?

 

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इस घटना के बाद कपाहड़ा पंचायत में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही असहमति और तेज होने के आसार हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि पंचायत के अन्य कितने उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार किया है।

ग्राम सभा में पारित हुआ था प्रस्ताव

विनय कुमार शर्मा के अनुसार गत 9 अगस्त को ग्राम पंचायत कपाहड़ा की ग्राम सभा में पुराने बिजली मीटर नहीं बदलने को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था। पंचायत की ओर से इस प्रस्ताव को संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों को भी भेजा गया था। प्रधान का कहना है कि ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी रखी। इसी बात को लेकर पंचायत और विद्युत विभाग के बीच मतभेद बढ़ते गए।

 

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प्रधान ने सवाल उठाया कि जब पंचायत ने उपभोक्ताओं की चिंताओं को सामने रखते हुए प्रस्ताव पारित किया था, तो विभाग को इस विषय पर संवाद करना चाहिए था। उनके मुताबिक, लोगों की आशंकाओं का समाधान किए बिना मीटर लगाने का दबाव बनाना उचित नहीं है।

नोटिस के बाद काटा गया बिजली कनेक्शन

पंचायत प्रधान ने बताया कि विद्युत विभाग की ओर से 14 अक्तूबर को उन्हें और उनके दिवंगत पिता के नाम पर स्मार्ट मीटर नहीं लगवाने को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों में 24 घंटे के भीतर स्मार्ट मीटर लगवाने की बात कही गई थी और ऐसा नहीं करने पर बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी। प्रधान के अनुसार, इसके बाद विभाग ने उनके घर की बिजली आपूर्ति काट दी। इस कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

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वहीं, घुमारवीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता कर्ण चंदेल ने कहा कि स्मार्ट मीटर नहीं लगवाने की स्थिति में बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी पहले ही दी गई थी। उन्होंने विभाग की कार्रवाई को नियमानुसार बताया है। इस तरह एक ही मामले में दोनों पक्षों के रुख अलग-अलग हैं। प्रधान जहां कार्रवाई को अनुचित बता रहे हैं, वहीं विभाग का कहना है कि उसने नियमों के तहत कदम उठाया है।

अब निजी जमीन पर लगे खंभे और तार हटाने की चेतावनी

बिजली कनेक्शन कटने से नाराज पंचायत प्रधान ने विभाग को एक और चेतावनी दी है। उन्होंने अपनी निजी जमीन पर लगे बिजली के खंभे और तार 24 घंटे के भीतर हटाने की बात कही है। इस चेतावनी के बाद विवाद का दायरा और बढ़ गया है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। हालांकि, बिजली के खंभों और तारों को हटाने की मांग पर विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाएगा, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

 

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हाईकोर्ट भी पहुंचे पंचायत प्रधान

स्मार्ट मीटर लगाने के मुद्दे पर विनय कुमार शर्मा ने न्यायिक रास्ता भी अपनाया है। प्रधान के अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अब इस विवाद में विभागीय कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर बिजली विभाग स्मार्ट मीटर लगाने के अपने अभियान के तहत कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रधान ग्राम सभा के प्रस्ताव और उपभोक्ताओं की आपत्तियों को आधार बनाकर इसका विरोध कर रहे हैं।

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हिमाचल में स्मार्ट मीटर पर क्यों बढ़ रहा विवाद?

बिलासपुर जिले की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विरोध और सवालों की चर्चा जारी है। कपाहड़ा में मामला इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई सीधे पंचायत प्रधान के घर पर हुई है। इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

क्या स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की आशंकाओं का समाधान संवाद के जरिए किया जा सकता है? ग्राम सभा के प्रस्ताव का विभागीय प्रक्रिया में क्या महत्व है? और स्मार्ट मीटर नहीं लगवाने की स्थिति में बिजली कनेक्शन काटने को लेकर किन नियमों का पालन किया गया? इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। फिलहाल, कपाहड़ा में पंचायत प्रधान और विद्युत विभाग के बीच टकराव ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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