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October 15, 2026
सुक्खू सरकार किसानों के लिए करने जा रही कुछ बड़ा, बदल जाएगी उनकी किस्मत! जानें क्या है मास्टर प्लान
पारंपरिक खेती को अलविदा कहेंगे किसान, नई तकनीक से बढ़ेगी आय
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई बड़े और दूरगामी कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के किसान अब सालों पुरानी पारंपरिक खेती को 'बाय-बाय' कहेंगे और आने वाले समय में आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को अपनाकर अपनी आय में भारी इजाफा करेंगे।
कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए राज्य सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से लेकर डिजिटल कृषि और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करने तक हर मोर्चे पर योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। हालांकि, प्राकृतिक खेती को पूरी तरह छोड़ने के बजाय सरकार की रणनीति में इसे प्रोत्साहित करना भी शामिल है। ऐसे में आने वाले समय में हिमाचल के किसानों के सामने खेती के अलग-अलग तरीकों और फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने के अधिक विकल्प विकसित करने पर जोर रहेगा।
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हिमाचल में खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने के बजाय अब आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई और फसल विविधीकरण से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की योजनाओं के तहत किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकें। सब्जियों के उत्पादन और प्राकृतिक खेती से तैयार हल्दी जैसी फसलों को बढ़ावा देना भी इसी दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।
हालांकि, प्राकृतिक खेती को पूरी तरह छोड़ने के बजाय सरकार की रणनीति में इसे प्रोत्साहित करना भी शामिल है। ऐसे में आने वाले समय में हिमाचल के किसानों के सामने खेती के अलग-अलग तरीकों और फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने के अधिक विकल्प विकसित करने पर जोर रहेगा।
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के दूसरे चरण यानी जाइका परियोजना के तहत प्रदेश में 306 उप-परियोजनाएं संचालित करने की योजना है। इनमें से अब तक 174 उप-परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। इन कार्यों के माध्यम से 4,462.16 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं विकसित की गई हैं, जबकि 1,323.80 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी उत्पादन के जरिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है।
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पानी की उपलब्धता बेहतर होने से खेती के विकल्प बढ़ सकते हैं। परियोजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध करवाना है, जिनसे वे पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों और अन्य उपयुक्त फसलों का उत्पादन भी कर सकें।
कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्वीकृत योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचाया जाए और विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए। कृषि विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 28.31 करोड़ रुपये और कृषि उन्नति योजना के अंतर्गत 36.51 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है। दोनों योजनाओं के तहत जारी राशि का कुल आंकड़ा 64.82 करोड़ रुपये है।
किसानों तक योजनाओं और कृषि सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए एग्रीस्टैक परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। कृषि मंत्री के अनुसार, इस परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार से 140 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं, चालू वर्ष में 400 करोड़ रुपये प्राप्त करने के लिए विभाग पात्र हो गया है।
डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना और किसानों के लिए योजनाओं तक पहुंच आसान करने की दिशा में काम करना है। इसके साथ ही कृषि मंत्री ने किसान हेल्पलाइन सेंटर का दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया और अधिकारियों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।
हिमाचल में प्राकृतिक खेती के साथ हल्दी जैसी पारंपरिक फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जाइका परियोजना के माध्यम से हमीरपुर, पालमपुर, सोलन और मंडी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों के सामने केवल उत्पादन बढ़ाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि उपज को सही बाजार तक पहुंचाना और बेहतर कीमत हासिल करना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अहम हो सकती है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किसान उत्पादन, संसाधनों के उपयोग और विपणन से जुड़ी गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित कर सकते हैं। जाइका परियोजना के तहत गठित एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने से किसानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा बाजार से जुड़ने के अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।