#राजनीति
October 16, 2026
कांग्रेस ने ही पैदा किया... जल्द वहीं लौटेंगे हर्ष महाजन! कुलदीप पठानिया का दावा: बोले- 'उनकी फितरत जानता हूं'
कुलदीप पठानिया के बयान से गरमाई हिमाचल की सियासत
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चंबा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने तीखा हमला बोला है। चंबा के विकास और राजनीतिक भविष्य को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब सीधे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है।
पठानिया ने महाजन की राजनीतिक भविष्यवाणियों पर पलटवार करते हुए दावा किया कि वह जल्द ही कांग्रेस में लौट सकते हैं। उन्होंने कहा, “हर्ष महाजन आज कह रहे हैं कि 15-20 साल तक कांग्रेस सत्ता में नहीं आएगी, लेकिन वह भूल रहे हैं कि कांग्रेस ने ही उन्हें पैदा किया है। मैं उनकी फितरत जानता हूं, वह जल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगे।”
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पठानिया के इस बयान ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ भाजपा सांसद हर्ष महाजन कांग्रेस के भविष्य और प्रदेश की राजनीति को लेकर दावे कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पठानिया उनके राजनीतिक सफर और दल बदलने के फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में चंबा से उठी जुबानी जंग का असर प्रदेश की व्यापक राजनीतिक चर्चा में भी दिखाई देने लगा है।
कुलदीप सिंह पठानिया ने हर्ष महाजन के राजनीतिक अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले नेताओं को अपने योगदान का हिसाब भी देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि महाजन और उनका परिवार लंबे समय तक राजनीति और सत्ता के केंद्र में रहे, तो चंबा आज भी विकास की चुनौतियों से क्यों जूझ रहा है?
पठानिया ने चंबा के पिछड़ेपन को लेकर महाजन पर निशाना साधते हुए कहा कि जिले की समस्याओं पर बात करना आसान है, लेकिन यह भी देखना होगा कि जिन लोगों के पास वर्षों तक राजनीतिक प्रभाव और सत्ता तक पहुंच रही, उन्होंने क्षेत्र के लिए क्या किया। स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़कों, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर चंबा को अभी भी काफी काम की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक रसूख या केंद्र सरकार तक पहुंच होने का दावा करने से जिले की तस्वीर नहीं बदलेगी। जनता को यह जानना है कि उस प्रभाव का इस्तेमाल विकास के लिए कितना हुआ और उसका वास्तविक लाभ लोगों तक कितना पहुंचा।
पठानिया ने हर्ष महाजन पर वर्ष 2024 के दौरान हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि महाजन उन राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े रहे, जिनके जरिए प्रदेश सरकार को गिराने की कोशिश की गई थी।
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विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े कुछ लोग आज भी उनसे मिलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। उनके अनुसार, कई नेताओं को बाद में राजनीतिक परिस्थितियों का एहसास हुआ। पठानिया ने आरोप लगाया कि महाजन की राजनीतिक रणनीति और सोच सफल नहीं होगी। हालांकि, ये पठानिया के राजनीतिक आरोप और दावे हैं। इस बयानबाजी के बीच प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच पुरानी राजनीतिक घटनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
हर्ष महाजन की ओर से केंद्र सरकार पर प्रभाव डालने और चंबा के लिए संसाधन जुटाने संबंधी दावों पर भी पठानिया ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि महाजन की केंद्र में इतनी पहुंच है और वह सरकार को अपनी बात मनवाने में सक्षम हैं, तो चंबा की पुरानी समस्याओं का समाधान तेजी से क्यों नहीं हो रहा?
पठानिया ने सवाल किया कि चंबा के लिए केंद्र से कितनी योजनाएं लाई गईं, कितने बड़े प्रोजेक्ट मंजूर हुए और उनका लाभ धरातल पर कितना दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रभाव की असली परीक्षा बयानबाजी में नहीं, बल्कि जनता के जीवन में बदलाव लाने में होती है। यह हमला सीधे तौर पर महाजन के उस राजनीतिक दावे पर केंद्रित रहा, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के स्तर पर अपनी पहुंच और प्रभाव का जिक्र किया था।
पठानिया ने हर्ष महाजन के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ रहे राजनीतिक दौर का उल्लेख करते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाजन लंबे समय तक प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के करीब रहे और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में रहे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस राजनीतिक पहुंच का चंबा के विकास के लिए कितना इस्तेमाल किया गया।
पठानिया ने महाजन के राजनीतिक सफर और चुनावी राजनीति से दूरी को लेकर भी सवाल किए। उनका कहना था कि जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना और अपने काम का हिसाब देना ही किसी नेता की वास्तविक राजनीतिक ताकत की परीक्षा है। इस तरह पठानिया ने महाजन के वर्तमान राजनीतिक बयानों को उनके पुराने राजनीतिक सफर से जोड़ते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की।
विधानसभा अध्यक्ष ने चंबा के पिछड़ेपन के मुद्दे को महाजन परिवार की पुरानी राजनीतिक भूमिका से जोड़ते हुए कहा कि जिले की मौजूदा स्थिति के लिए उन लोगों की जिम्मेदारी पर भी चर्चा होनी चाहिए, जो लंबे समय तक यहां की राजनीति में प्रभावशाली रहे। उनका तर्क है कि चंबा को विकास की मुख्यधारा में लाने की जिम्मेदारी केवल मौजूदा सरकार या केंद्र पर डालना पर्याप्त नहीं है। अतीत में सत्ता और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले नेताओं के योगदान का आकलन भी जरूरी है।
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दूसरी ओर, हर्ष महाजन चंबा के विकास के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर योजनाएं और संसाधन जुटाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में अब राजनीतिक बहस इस सवाल पर केंद्रित होती जा रही है कि जिले के विकास के लिए किसने क्या किया और किसके दावे कितने प्रभावी रहे।
इस पूरे घटनाक्रम में पठानिया का सबसे चर्चित बयान हर्ष महाजन की संभावित कांग्रेस वापसी को लेकर रहा। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए महाजन के बारे में पठानिया ने जिस आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह जल्द ही कांग्रेस में लौटेंगे, उसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को और हवा दे दी है।