रोहड़ू (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया भले ही समाप्त हो चुकी हो] लेकिन चुनाव परिणामों से निकल रही दिलचस्प कहानियां अभी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस बार के चुनावों में कई जगह पति-पत्नी ने जीत दर्ज कर सुर्खियां बटोरीं, तो कहीं भाई-बहन की जोड़ी को मतदाताओं ने भरपूर समर्थन दिया। वहीं शिमला जिला के रोहड़ू क्षेत्र से सामने आई एक पिता-पुत्र की कहानी इन दिनों विशेष चर्चा में है, जिसने स्थानीय राजनीति में एक नई मिसाल कायम कर दी है।
यहां एक ओर पिता ने पंचायत प्रधान पद पर लगातार अपना प्रभाव बरकरार रखते हुए सातवीं बार जीत हासिल की, तो दूसरी ओर बेटे ने जिला परिषद चुनाव में लगातार तीसरी जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत होने का प्रमाण दिया।
76 वर्ष की उम्र में भी कायम है जनता का भरोसा
रोहड़ू उपमंडल की समोली पंचायत में 76 वर्षीय प्रकाश रेटका ने एक बार फिर मतदाताओं का विश्वास जीत लिया। उन्होंने प्रधान पद का चुनाव जीतकर सातवीं बार पंचायत की कमान अपने हाथ में ली है। ग्रामीण राजनीति में यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि लगातार इतने लंबे समय तक जनता का विश्वास बनाए रखना आसान नहीं होता। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से पंचायत के विकास कार्यों और लोगों के साथ उनके सीधे जुड़ाव ने उन्हें क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाई है। यही वजह रही कि एक बार फिर मतदाताओं ने उनके पक्ष में जनादेश दिया।
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बेटे ने जिला परिषद में दर्ज की लगातार तीसरी जीत
जहां पिता ने पंचायत स्तर पर अपनी लोकप्रियता साबित की, वहीं बेटे सुरेंद्र रेटका ने जिला परिषद चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाकर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।
सुरेंद्र रेटका सीमा रंटाड़ी वार्ड से चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने लगातार तीसरी बार जिला परिषद सदस्य बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले वे जिला परिषद शिमला के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने अढ़ाल वार्ड से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार वार्ड के आरक्षित होने के कारण उन्होंने सीमा रंटाड़ी वार्ड से चुनाव लड़ा और यहां भी मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रहे।
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एक ही परिवार की दोहरी जीत बनी चर्चा का विषय
पिता और पुत्र की एक साथ जीत ने पूरे रोहड़ू क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना दिया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उनके घर पर समर्थकों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा। लोगों ने दोनों नेताओं को बधाई देकर उनकी जीत का जश्न मनाया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत चुनावों में अक्सर स्थानीय छवि और जनता से जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रेटका परिवार की यह सफलता इसी विश्वास और जनसंपर्क का परिणाम मानी जा रही है।
जनसेवा का संकल्प दोहराया
जीत के बाद प्रकाश रेटका और सुरेंद्र रेटका ने क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने जिस विश्वास के साथ उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है, उस पर खरा उतरना उनकी प्राथमिकता होगी। दोनों ने भरोसा दिलाया कि वे पहले की तरह जनता के बीच रहकर क्षेत्र के विकास और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे।
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रोहड़ू से निकली प्रेरणादायक कहानी
हिमाचल के पंचायत चुनावों में जहां कई नए चेहरे सामने आए हैं, वहीं रोहड़ू की यह पिता-पुत्र की जोड़ी इस चुनाव की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में शामिल हो गई है। एक ओर सात बार प्रधान बनने वाले अनुभवी पिता हैं, तो दूसरी ओर जिला परिषद में लगातार तीसरी जीत दर्ज करने वाला बेटा। यह परिणाम दर्शाता है कि जनसेवा और जनता का विश्वास वर्षों तक कायम रहे तो राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता रहता है।
