शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर–मरीज विवाद को लेकर चल रही खींचतान अब सुलझने की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। बीती देर रात इस मामले को लेकर आईजीएमसी प्रशासन, SAMDCOT और डॉक्टर राघव व उनकी मां के बीच बंद कमरे में लंबी बातचीत हुई। यह बैठक रात करीब दो बजे तक चली, जिसमें पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई।
दोनों पक्षों ने रखी अपनी-अपनी बात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान डॉ. राघव ने यह स्वीकार किया कि उनसे कुछ स्तर पर गलती हुई है, लेकिन उनका यह भी कहना रहा कि पूरे मामले में मरीज पक्ष की भूमिका को नजरअंदाज कर केवल डॉक्टर के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
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डॉ. राघव का तर्क था कि वायरल वीडियो के आधार पर बिना पूरी जांच के सीधे सेवा समाप्त करना उचित नहीं है। इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और संगठन के प्रतिनिधियों ने दोनों पक्षों की बात सुनी और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए।
RDA की ओर से मिले नरमी के संकेत
बताया जा रहा है कि, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे से लौटने के बाद इस मामले में अगला अहम कदम उठाया जा सकता है। संभावना है कि मुख्यमंत्री स्वयं रेजिडेंट डॉक्टरों, आईजीएमसी प्रशासन और संबंधित पक्षों को बातचीत के लिए बुला सकते हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) की ओर से भी नरमी के संकेत मिले हैं।
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RDA का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्तर से निष्पक्ष जांच और संतुलित समाधान का आश्वासन मिलता है तो डॉक्टर हड़ताल समाप्त करने को तैयार हैं। RDA का मानना है कि डॉक्टरों की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें।
IGMC में जारी हैं सामान्य सेवाएं
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आईजीएमसी में सेवाएं फिलहाल सामान्य रूप से जारी हैं और सभी की नजरें अब मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार की मध्यस्थता से यह विवाद जल्द सुलझ सकता है और अस्पताल में कामकाज पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।
