ऊना। हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनावों की मतगणना के बीच कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिला ऊना में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह नगर परिषद और नगर पंचायतों में से पांच पर कब्जा जमा लिया है। अपने ही जिले में कांग्रेस की इस कमजोर प्रदर्शन ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

 

निकाय चुनाव परिणामों ने साफ संकेत दिए हैं कि ऊना जिले में इस बार भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में बड़ी सफलता हासिल की है। खास तौर पर टाहलीवाल नगर पंचायत में भाजपा की जीत को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।

टाहलीवाल में भाजपा की बड़ी जीत

नगर पंचायत टाहलीवाल में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस केवल 2 सीटें ही जीत पाई। इस नतीजे के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि डिप्टी सीएम के गृह जिले में भाजपा की यह बढ़त कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

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ऊना जिले के निकायों में भाजपा का दबदबा

ऊना जिले के अधिकांश निकायों में भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।

  • नगर परिषद संतोषगढ़ में भाजपा ने 6 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की, जबकि कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं।
  • नगर पंचायत गगरेट में भाजपा ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 6 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया। यहां एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।
  • नगर पंचायत अंब में भाजपा ने 4 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं, जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
  • नगर परिषद मेहतपुर बसदेहड़ा में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। यहां भाजपा को 4, कांग्रेस को 3 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं।
  • नगर पंचायत टाहलीवाल में भाजपा को पांच सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस के हाथ यहां सिर्फ दो सीटें ही आई है। 

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दौलतपुर चौक में कांग्रेस को मिली राहत

हालांकि कांग्रेस को नगर पंचायत दौलतपुर चौक में राहत जरूर मिली, जहां पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा को केवल 2 सीटों तक सीमित कर दिया।

लेकिन कुल परिणामों को देखें तो ऊना जिले में भाजपा का पलड़ा भारी नजर आया है।

कांग्रेस के लिए बढ़ी चिंता

ऊना जिले के नतीजों ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। जिस जिले को पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहीं भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल कर सियासी संदेश देने की कोशिश की है।

अब इन परिणामों को आने वाले राजनीतिक समीकरणों और भविष्य के चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वहीं भाजपा इस जीत को प्रदेश में अपनी बढ़ती पकड़ का संकेत बता रही है।

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