शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रहा। इसी बीच लाहौल घाटी में बादल फटने की घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। चोखंग क्षेत्र के गौरी नाला में बादल फटने से चोखंग-नैनगाहर सड़क का करीब 400 से 500 मीटर हिस्सा पूरी तरह बह गया, जिससे सड़क का नामोनिशान तक मिट गया। मार्ग बाधित होने के कारण वाहनों की आवाजाही ठप है और नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ किसानों की सब्जियों से लदी गाड़ियां भी रास्ते में फंस गई हैं।
गौरी नाला में बादल फटने से सड़क का बड़ा हिस्सा बहा
लाहौल घाटी के चोखंग क्षेत्र में सोमवार देर शाम गौरी नाला में अचानक बादल फटने से तेज पानी का बहाव आया। पानी के साथ भारी मलबा आने से चोखंग-नैनगाहर सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। करीब आधा किलोमीटर सड़क बह जाने के कारण इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने मंगलवार सुबह सड़क बहाली का काम शुरू कर दिया। हालांकि सड़क को दोबारा यातायात के लिए खोलने में समय लगने की संभावना है।
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श्रद्धालुओं और किसानों की बढ़ी परेशानी
सड़क बंद होने का सीधा असर स्थानीय लोगों के साथ किसानों पर भी पड़ा है। इन दिनों लाहौल घाटी में सब्जियों का सीजन चरम पर है और किसान रोजाना अपनी उपज वाहनों के जरिए मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। मार्ग बंद होने से सब्जियों से लदी कई गाड़ियां फंस गई हैं। वहीं नीलकंठ की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मूरिंग पंचायत के प्रधान संदीप पुजारा ने प्रशासन से सड़क को जल्द बहाल करने की मांग की है, ताकि किसानों की उपज खराब न हो और लोगों की आवाजाही सामान्य हो सके।
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बारिश-भूस्खलन से प्रदेश में 105 सड़कें बाधित
भारी बारिश और भूस्खलन ने प्रदेश के कई हिस्सों में यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। मंगलवार सुबह 10 बजे तक राज्य में 105 सड़कें बंद रहीं। इनमें सबसे ज्यादा सड़कें कुल्लू और मंडी जिलों में प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा बारिश के कारण 36 बिजली ट्रांसफार्मर और 15 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित चल रही हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में बहाली के कार्य में जुटे हुए हैं।
मानसून की तबाही में अब तक 196 लोगों की मौत
इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश में भारी नुकसान पहुंचाया है। 30 जून से 17 अगस्त तक बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के कारण 196 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 299 लोग घायल हुए हैं। इस अवधि में 32 पक्के और 53 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 312 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। आपदा की चपेट में 14 दुकानें और 270 गोशालाएं भी आई हैं। इसके अलावा 425 पालतू पशु-पक्षियों की मौत दर्ज की गई है।
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करीब 995 करोड़ रुपये तक पहुंचा नुकसान
प्रदेश में मानसून के दौरान जान-माल और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक राज्य में करीब 99,479.96 लाख रुपये यानी लगभग 995 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया जा चुका है। लगातार जारी बारिश को देखते हुए आने वाले दिनों में नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
आज तीन जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आज हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं मंडी, शिमला और सिरमौर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों को संवेदनशील क्षेत्रों, नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित मार्गों से दूर रहने की सलाह दी है।
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24 अगस्त तक बारिश से राहत के आसार कम
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में 24 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। 19 अगस्त को हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा। 20 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 21 अगस्त को कांगड़ा और मंडी के कुछ हिस्सों में भी येलो अलर्ट रहेगा। ऐसे में प्रदेश में अगले कई दिनों तक मौसम खराब रहने और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन व सड़क बाधित होने का खतरा बना रहेगा।
