नालागढ़ (सोलन): हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल की चिल्लड़ पंचायत के लूणा गांव में गुरुवार का दिन गमगीन रहा। गांव के वीर सपूत और सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह का आज उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उनकी पार्थिव देह गांव पहुंची, माहौल पूरी तरह मातम में बदल गया। घर में मौजूद परिजनों के विलाप और मां-पत्नी की चीखों से पूरा क्षेत्र दहल उठा।
लक्ष्मण सिंह की अंतिम विदाई का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब उनके महज 10 वर्षीय बड़े बेटे श्रेय ठाकुर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे को पिता की चिता के सामने खड़ा देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। जिसने भी यह दृश्य देखा, वह अपने आंसू नहीं रोक सका। एक तरफ परिवार ने अपना सहारा खो दिया, वहीं गांव ने अपने बहादुर बेटे को नम आंखों से विदा किया।
सुबह छह बजे गांव पहुंची पार्थिव देह
सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह की पार्थिव देह गुरुवार सुबह करीब 6 बजे जम्मू के कठुआ से एंबुलेंस के माध्यम से उनके पैतृक गांव लूणा पहुंची। एंबुलेंस के गांव में पहुंचते ही माहौल अचानक गम में डूब गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
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पार्थिव देह घर पहुंचते ही मां शांति देवी और पत्नी कमलेश कुमारी की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। परिजनों के विलाप ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। ग्रामीण बड़ी संख्या में अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए घर और अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचे।
जवान के 10 और 4 साल के हैं दो बेटे
लक्ष्मण सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया, जब उनके बड़े बेटे 10 वर्षीय श्रेय ठाकुर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इतनी कम उम्र में पिता को अंतिम विदाई देते बेटे को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं। श्रेय के छोटे भाई की उम्र महज चार वर्ष बताई गई है। परिवार के दोनों मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों के बीच यही चर्चा रही कि जिस उम्र में बच्चों को पिता का हाथ पकड़कर चलना सीखना चाहिए, उसी उम्र में श्रेय को अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी।
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पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
लक्ष्मण सिंह को उनके साथी जवानों और पुलिस कर्मियों ने पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। सीआईएसएफ की ओर से सब इंस्पेक्टर केएवी कोलिन और मुख्य आरक्षी धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में जवान गांव पहुंचे और शहीद को अंतिम सलामी दी। पुलिस विभाग की ओर से रामशहर के एसआई बलवीर सिंह और हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में करीब 10 जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के बीच जब लक्ष्मण सिंह की अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोग इसमें शामिल हुए।
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हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे लक्ष्मण सिंह
लक्ष्मण सिंह जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र के माशका गांव स्थित एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी दौरान सीआईएसएफ की क्यूआरटी बी शिफ्ट में तैनात हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह पर अपनी सर्विस एके-47 राइफल से फायरिंग करने का आरोप है। बताया गया कि इस गोलीबारी में कुल चार सीआईएसएफ कर्मियों की जान चली गई। इनमें सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह के अलावा असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार शामिल थे। घटना के बाद सभी को उपचार के लिए चंबा के खैरी स्थित एनएचपीसी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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परिवार का इकलौता बेटा था लक्ष्मण सिंह
लक्ष्मण सिंह अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता बलवीर सिंह और माता शांति देवी गांव में रहते हैं। उनकी एक शादीशुदा बहन भी है। बुजुर्ग माता-पिता के लिए बेटे का यूं अचानक चले जाना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार लक्ष्मण सिंह अपने माता-पिता के बेहद करीब थे। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ-साथ वह सीआईएसएफ में अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। उनकी पत्नी कमलेश कुमारी और दोनों बच्चे भी उनके साथ कठुआ में रह रहे थे।
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बुजुर्ग माता-पिता को देर से दी गई सूचना
लक्ष्मण सिंह के निधन की सूचना उनके बुजुर्ग माता-पिता को तत्काल नहीं दी गई। परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेटे के निधन की जानकारी देने में सावधानी बरती गई। लूणा गांव के पूर्व सैनिक सूबेदार मदन लाल के अनुसार, घर में बुजुर्ग माता-पिता अकेले रहते हैं और बेटे की मौत की खबर उनके लिए बेहद बड़ा आघात थी। उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने भी इस संबंध में जानकारी की पुष्टि की है।
अंतिम विदाई में उमड़ा पूरा क्षेत्र
लक्ष्मण सिंह की अंतिम यात्रा में प्रशासन, पुलिस, पूर्व सैनिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। नागरिक प्रशासन की ओर से तहसीलदार रामशहर अभिषेक सिंह ठाकुर और नायब तहसीलदार राजेंद्र सिंह ठाकुर मौजूद रहे।
