मंडी। एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली हिमाचल के मंडी जिले की बेटी ने आवाज उठाई है। गोहर क्षेत्र के मलोट गांव की भावना ठाकुर ने प्रदेश सरकार की ओर से घोषित पुरस्कार राशि को लेकर अपनी मांग सामने रखी है।

33 लाख से नाखुश गोल्डन गर्ल भावना

भावना का कहना है कि स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद कबड्डी खिलाड़ियों को दूसरे खेलों के पदक विजेताओं की तुलना में कम आर्थिक पुरस्कार मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने नई खेल नीति के तहत हिमाचल के पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए 33-33 लाख रुपये की पुरस्कार राशि घोषित की है।

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क्या बोलीं भावना ठाकुर?

भावना ठाकुर का कहना है कि खिलाड़ियों की मेहनत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश-प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने को देखते हुए कबड्डी खिलाड़ियों के लिए भी अधिक पुरस्कार राशि तय की जानी चाहिए। भावना ने कहा है कि वह इस विषय को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सामने रखेंगी।

क्या है भावना की मांग?

उन्होंने हिमाचल की चारों कबड्डी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपये देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पक्की सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है।

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मेहनत के अनरूप मिले इनाम

भावना ठाकुर के मुताबिक एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सम्मान मिलना जरूरी है। उनका कहना है कि पुरस्कार राशि खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धि के अनुरूप होनी चाहिए।

CM के सामने रखेंगी खिलाड़ियों का मुद्दा

उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगी। भावना के मुताबिक हिमाचल की चारों कबड्डी खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की सफलता में योगदान दिया है, इसलिए सभी के लिए समान रूप से एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

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क्यों चाहिए सरकारी नौकरी?

इसके अलावा उन्होंने खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि खेल करियर की अवधि सीमित होती है- इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए रोजगार का प्रावधान भी होना चाहिए।

जापान में फाइनल जीतकर भारत ने जीता था गोल्ड

एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम का सामना ईरान से हुआ था। मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

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कैसा था प्रतियोगिता में मुकाबला?

भावना ने बताया कि इस प्रतियोगिता में इस बार मुकाबला पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। चीनी ताइपे और ईरान जैसी टीमों ने भारतीय टीम को कड़ी टक्कर दी। ऐसे में स्वर्ण पदक तक पहुंचने के लिए टीम को हर मुकाबले में बेहतर रणनीति और सामूहिक प्रदर्शन की जरूरत थी।

 

कितनी देर मैदान पर रहीं भावना?

भावना ठाकुर ने फाइनल मुकाबले में करीब 15 मिनट तक मैदान पर रहकर टीम के लिए महत्वपूर्ण अंक जुटाए। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय किसी एक खिलाड़ी को देने के बजाय पूरी टीम के तालमेल और एकजुटता को दिया।

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कैसे जिता गोल्ड मेडल?

उनका कहना है कि कबड्डी में व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ-साथ टीम के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी होता है। भारतीय टीम ने इसी सामंजस्य के साथ दबाव वाले मुकाबलों का सामना किया और अंत में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही।

कौन थीं टीम की कप्तान?

भावना ने बताया कि कप्तान पुष्पा राणा के नेतृत्व में हिमाचल की चारों खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य तय किया था। सभी खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का साथ देते हुए टीम की रणनीति के मुताबिक प्रदर्शन किया।

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भावना के करियर का सबसे बड़ा मंच?

उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स उनके करियर के सबसे बड़े मंचों में से एक रहा। इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत और संघर्ष किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की मजबूत टीमों के बीच खेलकर स्वर्ण पदक हासिल करना उनके लिए विशेष उपलब्धि है।

आगे भी बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य

भावना ठाकुर ने कहा कि एशियन गेम्स में मिली सफलता के बाद उनकी कोशिश आने वाली प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन करने की रहेगी। साथ ही वह चाहती हैं कि सरकार खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देखते हुए पुरस्कार राशि और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े उनके मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करे।

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खेल नीति में खिलाड़ियों के लिए क्या प्रावधान?

प्रतियोगिता :

  • ओलंपिक/विंटर ओलंपिक/पैरालंपिक-
  • गोल्ड- ₹5 करोड़
  • सिल्वर- ₹3 करोड़
  • ब्रॉन्ज- ₹2 करोड़

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  • एशियन गेम्स/पैरा एशियन गेम्स
  • गोल्ड- ₹4 करोड़
  • सिल्वर- ₹2.50 करोड़
  • ब्रॉन्ज- ₹1.50 करोड़

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  • कॉमनवेल्थ/पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स
  • गोल्ड- ₹3 करोड़
  • सिल्वर- ₹2 करोड़
  • ब्रॉन्ज- ₹1 करोड़

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