शिमला। हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ केंद्र की मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। लोकसभा में हिमाचल के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए व्यापक सुधारों को सामने रखा और बताया कि कैसे इन कदमों से करोड़ों अपात्र लाभार्थियों की पहचान हुई है। उन्होंने खुलासा किया कि अकेले हिमाचल प्रदेश में ही 25,357 अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं, जो लंबे समय से फर्जी तरीके से सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे।

देशभर में 8.51 करोड़ संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान

सांसद ने मोदी सरकार के व्यापक सुधारों को प्रमुखता से रखते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने देशभर में सरकारी डेटाबेस के समन्वय से 8.51 करोड़ संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान की है। इसमें से अब तक 2.21 करोड़ अपात्रों को हटाया जा चुका है। सालों से अपात्र लोग गरीबों के निवाले को डकार रहे थे। मोदी सरकार ने 100 % राशन कार्डों का डिजिटलीकरण कर और उन्हें आधार से जोड़कर इस लूट को बंद कर दिया है।

 

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हिमाचल में 25 हजार फर्जी राशन कार्ड रद्द

अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि हिमाचल प्रदेश में राइटफुल टार्गेटिंग अभियान के तहत कुल 5,32,435 लाभार्थियों को सत्यापन के दायरे में लाया गया। इस अभियान में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। अकेले हिमाचल प्रदेश में 25 हजार से अधिक अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। यह कार्रवाई इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे असली जरूरतमंदों तक खाद्य सब्सिडी का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

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सांसद ने कहा कि इस अभियान के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि कई ऐसे लोग राशन ले रहे थे जो या तो आयकर दाता हैं, कंपनियों में निदेशक हैं या फिर अब इस दुनिया में नहीं हैं। अब इन सभी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

केंद्र सरकार द्वारा राशन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा चुका है। राशन कार्डों को आधार से जोड़ा गया है और फेयर प्राइस शॉप्स पर ई-पॉइंट ऑफ सेल मशीनें लगाई गई हैं, जिससे बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही राशन वितरण हो रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और फर्जीवाड़े पर काफी हद तक लगाम लगी है।

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अनुराग ठाकुर ने जोर देकर कहा कि अब राशन वितरण प्रणाली पूरी तरह तकनीक से लैस है:

 

  • ई-केवाईसी (e-KYC): लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है।
  • ई-पॉस (e-POS) मशीनें: हिमाचल सहित देशभर की लगभग सभी उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) को ई-पॉस मशीनों से लैस कर दिया गया है।
  • बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण: अब बिना अंगूठा लगाए या बिना प्रमाणीकरण के राशन लेना नामुमकिन है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है।

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पात्रों को घबराने की जरूरत नहीं

सदन में सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद किसी का हक छीनना नहीं बल्कि हकदार तक उसका हक पहुंचाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी तकनीकी समस्या के चलते किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। केंद्र सरकार एक ओर व्यवस्था को स्वच्छ बना रही है, तो दूसरी ओर वितरण तंत्र को अधिक मजबूत और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रही है।

 

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