#अपराध
April 3, 2026
हिमाचल : राजपूत से फर्जी गुज्जर बन डिप्टी रेंजर की पोस्ट तक पहुंचा प्रकाश चंद, अब हुई जेल
सरकारी विभाग को किया गुमराह
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश में जहां एक तरफ युवा कड़ी मेहनत कर सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं, वहीं कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिस्टम को चकमा दे रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला जिला मंडी से सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने खुद को गुज्जर समुदाय का बताकर न सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि डिप्टी रेंजर जैसे अहम पद तक पहुंच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला मंडी से सामने आया है। यहां पर प्रकाश चंद ने खुद को गुज्जर (ST) बताकर नौकरी में फायदा उठाया था। वह साल 1983 में वन निगम में एक साधारण कर्मचारी (टिम्बर वाचर) के तौर पर भर्ती हुआ था। बाद में 1991 में उसने एक प्रमाण पत्र लगाया, जिसमें खुद को गुज्जर बताया। इसी आधार पर उसकी नौकरी पक्की हो गई और धीरे-धीरे प्रमोशन लेकर वह डिप्टी रेंजर तक पहुंच गया।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब काफलोग निवासी जीत राम ने इसकी शिकायत की। शिकायत के बाद मामले की जांच SDM सरकाघाट से करवाई गई। जांच में जो सच्चाई सामने आई, वह हैरान करने वाली थी।
पता चला कि प्रकाश चंद असल में राजपूत जाति से संबंध रखता है, जबकि उसने खुद को गुज्जर बताकर फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, जिस क्रम संख्या का प्रमाण पत्र उसने विभाग में जमा किया था, वह रिकॉर्ड के अनुसार बर्फी देवी नाम की महिला के नाम पर जारी हुआ था।
जांच के दौरान तत्कालीन कार्यकारी मैजिस्ट्रेट ने भी कोर्ट में गवाही दी कि उस प्रमाण पत्र पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं, यानी सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी था। इससे साफ हो गया कि आरोपी ने सोची-समझी साजिश के तहत गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने यह दलील दी कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, लेकिन अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी विभाग को गुमराह किया और आरक्षित वर्ग के लिए मिलने वाले लाभ उठाए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 3 साल की सजा और जुर्माने को बरकरार रखा। अदालत ने साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन कर इस तरह नौकरी हासिल करना और प्रमोशन लेना पूरी तरह गैरकानूनी है।