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May 19, 2026

हिमाचल : महंगाई का नया वार, दूध और पेट्रोल के बाद अब ब्रेड के भी बढ़े दाम- आम आदमी परेशान

बढ़ती महंगाई- जनता की जेब पर पड़ रहा सीधा असर

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शिमला। देश और हिमाचल में लगातार बढ़ती महंगाई ने अब आम आदमी की रसोई और नाश्ते तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों के बीच अब ब्रेड भी महंगी हो गई है।

महंगाई का नया वार

मुंबई में कई बड़ी कंपनियों ने 16 मई से हर तरह की ब्रेड पर 5 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसका सीधा असर लाखों लोगों की जेब पर पड़ने वाला है, जिनके दिन की शुरुआत ब्रेड, पाव, सैंडविच और वड़ा पाव जैसे खाद्य पदार्थों से होती है।

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क्यों बढ़े ब्रेड के दाम?

ब्रेड की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पाउडर की कीमतों में बढ़ोतरी है। भारत में यह कच्चा माल बड़े स्तर पर आयात किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की कमजोरी के कारण इसका आयात महंगा हो गया है।

पेट्रोल-डीजल भी महंगा

इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने ट्रांसपोर्टेशन लागत को भी काफी बढ़ा दिया है। ब्रेड में इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स और अन्य सामग्री की कीमतें भी बढ़ी हैं। इन सबका असर अब सीधे ग्राहकों पर डाला जा रहा है।

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अब कितनी महंगी हुई ब्रेड?

नई कीमतों के अनुसार-

  • 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड: 40 से बढ़कर 45 रुपये
  • होल व्हीट ब्रेड: 55 से बढ़कर 60 रुपये
  • मल्टीग्रेन ब्रेड: 60 से बढ़कर 65 रुपये
  • स्मॉल ब्राउन लोफ: 28 से बढ़कर 30 रुपये
  • व्हाइट लोफ: 20 से बढ़कर 22 रुपये
  • ब्राउन ब्रेड: 45 से बढ़कर 50 रुपये

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जनता की जेब पर सीधा असर

मुंबई जैसे शहर में लाखों लोग रोजाना वड़ा पाव, मिसल पाव, भाजी पाव और सैंडविच खाते हैं। खासकर ऑफिस जाने वाले लोग, मजदूर, छात्र और मध्यम वर्ग ब्रेड आधारित चीजों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। ऐसे में ब्रेड महंगी होने से सिर्फ ब्रेड ही नहीं, उससे बनने वाले सभी खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ने की संभावना है।

बेकरी मालिकों की बढ़ी परेशानी

बेकरी संचालकों का कहना है कि पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, आयातित कच्चे माल और रुपये की गिरती कीमतों ने उत्पादन लागत को बहुत बढ़ा दिया है। वहीं दूध और अन्य खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर महंगाई की यही रफ्तार रही, तो आम आदमी की थाली में अगला झटका किस चीज पर पड़ेगा।

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