हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर का राजनीतिक कद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुआ है। अपनी दमदार कार्यशैली, बेबाक अंदाज और संसदीय मामलों की गहरी समझ के लिए पहचाने जाने वाले अनुराग ठाकुर को देश की सबसे प्रभावशाली संसदीय समितियों में गिनी जाने वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) का लगातार तीसरी बार सदस्य निर्वाचित किया गया है।
तीसरी बार PAC के सदस्य बने अनुराग
अनुराग ठाकुर को वर्ष 2026-27 के कार्यकाल के लिए संसद की प्रतिष्ठित लोक लेखा समिति का पुनः सदस्य निर्वाचित किया गया है। सरकारी खजाने के एक-एक पैसे पर पहरेदारी करने वाली इस सबसे ताकतवर समिति में यह उनकी लगातार तीसरी नियुक्ति है, जो उनके बढ़ते कद और विशेषज्ञता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
इस संसदीय समिति में शामिल राज्यसभा सदस्यों में भाजपा के अशोक चव्हाण, के लक्ष्मण और सुधांशु त्रिवेदी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद प्रफुल्ल पटेल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर और कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह शामिल हैं।
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लोकसभा में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अनुराग ठाकुर लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। संसद में उनकी सक्रियता, विभिन्न मुद्दों पर स्पष्ट राय और नीतिगत चर्चाओं में प्रभावी भागीदारी ने उन्हें भाजपा के बड़े और भरोसेमंद नेताओं की श्रेणी में ला खड़ा किया है।
लोक सेवा समिति में किन-किन को मिली जगह
एक मई, 2026 से शुरू होने वाले और 30 अप्रैल, 2027 को समाप्त होने वाले कार्यकाल के लिए लोक लेखा समिति के अन्य सदस्यों में द्रमुक के टीआर बालू, टीएमसी के कल्याण बनर्जी भाजपा के निशिकांत दुबे, जगदंबिका पाल, रविशंकर प्रसाद, सीएम रमेश, अपराजिता सारंगी, तेजस्वी सूर्या, अनुराग सिंह ठाकुर, कांग्रेस के जय प्रकाश, अमर सिंह शामिल हैं।
अदभुत कार्यशैली ने दिलाई हैट्रिक
देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण संसदीय समिति में लगातार तीन बार जगह बनाना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अनुराग ठाकुर की उस कार्यशैली का परिणाम है, जिसमें वह हर विषय की गहराई तक जाकर तथ्यों को मजबूती से रखते हैं। इससे पहले उन्हें वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए भी इस समिति का सदस्य चुना गया था। लगातार तीन बार इस समिति में नियुक्ति को राजनीतिक गलियारों में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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आखिर क्यों खास है लोक लेखा समिति
संसद की लोक लेखा समिति को देश की सबसे ताकतवर वित्तीय निगरानी समिति माना जाता है। यह समिति केंद्र सरकार के खर्चों और वित्तीय कार्यप्रणाली पर नजर रखती है। सरकारी धन कहां और किस तरह खर्च हो रहा हैए इसकी जवाबदेही तय करना इस समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।
समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्टों की गहराई से जांच करती है और वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठाने का अधिकार भी रखती है। यही वजह है कि इस समिति में उन्हीं नेताओं को जगह मिलती है, जिनकी संसदीय समझ और प्रशासनिक अनुभव बेहद मजबूत माना जाता है।
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अनुराग ठाकुर का बड़ा कद
अनुराग ठाकुर की पीएसी जैसी सर्वोच्च समिति में निरंतर मौजूदगी से न केवल केंद्र सरकार में उनका प्रभाव साबित होता है, बल्कि इससे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की आवाज को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिली है। एक दमदार नेता के रूप में उनकी पहचान अब केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश के उन चुनिंदा सांसदों की कतार में खड़े हैं जो संसदीय गरिमा और निगरानी के मानकों को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं।
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समर्थकों में उत्साह
उनकी इस नियुक्ति से हिमाचल भाजपा और उनके समर्थकों में भारी उत्साह है। माना जा रहा है कि संसद में उनके इस बढ़ते रसूख का सीधा लाभ आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और विकास की योजनाओं को मजबूती देने में मिलेगा।
