शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव भले ही संपन्न हो चुके हों] लेकिन चुनावी नतीजों से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां अब भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कहीं पति-पत्नी आमने-सामने थे तो कहीं रिश्तेदारों के बीच मुकाबला देखने को मिला। लेकिन राजधानी शिमला जिला की एक पंचायत से सामने आया चुनावी मुकाबला सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है, जहां प्रधान पद के लिए सगे दादा और पोता ही चुनावी मैदान में एक-दूसरे के सामने उतर गए।

 

रामपुर विकास खंड की फुंजा पंचायत में प्रधान पद का चुनाव केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं था, बल्कि यह अनुभव और युवा सोच के बीच की सीधी टक्कर बन गया था। पूरे चुनाव के दौरान ग्रामीणों की नजरें इसी मुकाबले पर टिकी रहीं कि आखिर पंचायत की जनता किसे अपना नेतृत्व सौंपेगी।

एक ही परिवार के दो दावेदार

फुंजा पंचायत में प्रधान पद के लिए वरिष्ठ और अनुभवी प्रेम लाल टैगटा तथा उनके पोते गुडू टैगटा ने नामांकन दाखिल किया था। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती गई, यह मुकाबला लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बनता गया। ग्रामीणों के बीच यह सवाल लगातार उठता रहा कि क्या मतदाता वर्षों के अनुभव को तरजीह देंगे या फिर नई सोच और युवा नेतृत्व को मौका देंगे। चुनाव प्रचार के दौरान भी दोनों उम्मीदवारों को लेकर पंचायत में खूब चर्चाएं होती रहीं।

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जनता ने युवा चेहरे को चुना

जब मतगणना पूरी हुई तो परिणाम ने साफ संकेत दे दिया कि इस बार पंचायत की जनता बदलाव और युवा नेतृत्व के पक्ष में खड़ी दिखाई दी। प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे गुडू टैगटा को 713 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके दादा प्रेम लाल टैगटा को 391 वोट मिले। इस तरह गुडू टैगटा ने 322 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज करते हुए प्रधान पद पर कब्जा जमा लिया। चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पंचायत के मतदाताओं ने विकास के लिए नई पीढ़ी पर भरोसा जताया है।

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हार के बाद दादा ने दिया आशीर्वाद

इस चुनावी मुकाबले की सबसे खूबसूरत तस्वीर परिणाम आने के बाद देखने को मिली। हार के बावजूद प्रेम लाल टैगटा ने जनता के फैसले का सम्मान किया और अपने पोते को जीत की बधाई देते हुए आशीर्वाद दिया। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र की यही सबसे बड़ी ताकत है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा रिश्तों को प्रभावित नहीं करती। चुनाव खत्म होते ही परिवार फिर एकजुट दिखाई दिया और दोनों पक्षों ने लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया।

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जीत के बाद विकास का वादा

प्रधान चुने जाने के बाद गुडू टैगटा ने पंचायतवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे वह पूरी ईमानदारी और मेहनत से निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का पारिवारिक रिश्तों से कोई संबंध नहीं है। उनकी प्राथमिकता पंचायत का समग्र विकास, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना तथा ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना रहेगा।

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पंचायत चुनावों की सबसे दिलचस्प कहानी

हिमाचल के पंचायत चुनावों में कई रोचक मुकाबले देखने को मिले, लेकिन फुंजा पंचायत में दादा और पोते के बीच हुई चुनावी जंग ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह मुकाबला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर बदलती सोच और युवा नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत भी है। लोकतंत्र के इस अनोखे मुकाबले में आखिरकार जनता ने युवा जोश को अनुभव पर तरजीह दी और पोते को पंचायत की कमान सौंप दी।

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