शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले दिनों हुई अचानक भारी बर्फबारी कई भेड़पालकों पर भारी पड़ गई है। शिमला जिले के डोडरा-क्वार और किन्नौर के सांगला के बीच स्थित रूपिन दर्रे में तीन फीट से अधिक बर्फ जमने से 2,000 से ज्यादा भेड़-बकरियों के बर्फ के नीचे दबने की आशंका जताई गई है। बर्फबारी की घटना के करीब पांच दिन बाद भी इन जानवरों को बाहर निकालने का काम चुनौती बना हुआ है।

 

बताया जा रहा है कि चरवाहे अपने झुंडों के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सर्दियों के लिए निचले इलाकों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान रूपिन दर्रा पार करते समय मौसम ने अचानक करवट बदली और भारी बर्फबारी शुरू हो गई। देखते ही देखते रास्तों और आसपास के क्षेत्र में बर्फ की मोटी परत जम गई। कई चरवाहे तो किसी तरह वापस लौट आए, लेकिन जो लोग दर्रा पार कर चुके थे, उनके लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को दिया बड़ा झटका, इन अधिसूचनाओं को बताया अवैध, कीं रद्द

तीन फीट बर्फ के नीचे दबे हजारों पशु!

रूपिन दर्रे में हालात कितने कठिन हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां तीन फीट से ज्यादा बर्फ जमा होने की सूचना है। चरवाहों का दावा है कि उनके झुंड में शामिल बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां बर्फ के नीचे दब गई हैं। रेस्क्यू टीम को मौके पर कुछ बड़े जानवरों के केवल सींग बर्फ के बीच दिखाई देने की बात सामने आई है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में बढ़ गए LPG सिलेंडर के दाम, त्यौहारी सीजन में जनता को महंगाई का झटका; जानें नई दरें

 

वहीं, बर्फ की मोटी परत के नीचे दबे छोटे जानवरों की वास्तविक स्थिति का अभी पता नहीं चल पाया है। हालांकि, प्रशासन के अनुसार अभी पशुधन के नुकसान की अंतिम संख्या सामने नहीं आई है। बर्फ पिघलने और इलाके का विस्तृत निरीक्षण होने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।

पांच दिन बाद भी चुनौती बरकरार

भारी बर्फबारी के कई दिन गुजर जाने के बाद भी रूपिन दर्रे में फंसे पशुओं तक पहुंचना आसान नहीं है। ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां रेस्क्यू अभियान में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। चरवाहों के मुताबिक बर्फबारी के कारण जानवर आगे नहीं बढ़ सके और कई झुंड रास्ते में ही फंस गए। अब उनकी नजर प्रशासन की रेस्क्यू कार्रवाई पर टिकी है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में सैंकड़ों आउटसोर्स कर्मियों की गई नौकरी! 13 साल की सेवा...क्या फिर ढूंढनी पड़ेगी Job

मंत्री जगत सिंह नेगी ने दिए रेस्क्यू के निर्देश

मामले की जानकारी मिलने के बाद राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने डोडरा-क्वार के एसडीएम को तत्काल रेस्क्यू टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को शामिल करते हुए टीम तैयार की गई है। प्रशासन की टीम रूपिन दर्रे की ओर बढ़ रही है और मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रही है। टीम सैटेलाइट फोन के माध्यम से प्रशासन के संपर्क में भी बताई जा रही है, ताकि दुर्गम क्षेत्र से लगातार जानकारी हासिल की जा सके।

 

यह भी पढ़ें : ‘कई सिम्मियां म..र गईं’- डिप्टी CM की पत्नी पर BJP नेता का विवादित बयान, बोले- ये सहानुभूति का गेम

निचले क्षेत्रों की ओर लौट रहे थे चरवाहे

बताया जा रहा है कि सितंबर के अंत में ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम अचानक बिगड़ गया। चरवाहे सर्दियों से पहले अपने पशुओं को लेकर निचले क्षेत्रों की तरफ लौट रहे थे। इसी दौरान रूपिन दर्रे में बर्फबारी शुरू हो गई। अचानक मौसम खराब होने से कुछ चरवाहों ने वापस लौटने का फैसला किया, जबकि कुछ चरवाहे पहले ही दर्रा पार कर चुके थे। भारी बर्फबारी के बाद उनके लिए वापस आना मुश्किल हो गया। दूसरी ओर, बर्फ में फंसने के कारण पशुओं के झुंड भी आगे नहीं बढ़ सके।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में सुबह-सवेरे हाद**सा : ऑल्टो चालक को आई नींद की झपकी, तीन बच्चों समेत 6 गंभीर

बर्फ हटने के बाद साफ होगी स्थिति

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार शुरुआती जानकारी में करीब 2,000 पशुओं के फंसे या बर्फ में दबे होने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक नुकसान का पता बर्फ हटने और इलाके का पूरा निरीक्षण होने के बाद ही चल पाएगा। प्रशासन की ओर से नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए एक अन्य टीम भेजने की तैयारी भी की जा रही है। इसके बाद प्रभावित भेड़पालकों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

यह भी पढ़ें- टांडा कॉलेज में PG डॉक्टर से बदसलूकी- स्टाफ कर्मी ने गलत तरीके से छुआ, गंदी हरकत भी की

प्रभावित भेड़पालकों को राहत की उम्मीद

इस घटना से प्रभावित चरवाहों को अब सरकार से राहत की उम्मीद है। मंत्री ने संकेत दिया है कि नुकसान का सटीक आकलन होने के बाद प्रभावित लोगों को राहत सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार की ओर से विशेष राहत पैकेज के जरिए भी प्रभावित भेड़पालकों की मदद करने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अब चरवाहों की निगाह प्रशासन की रिपोर्ट और सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता पर टिकी है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें