सिरमौर। कहते हैं बच्चों की दिन बहुत साफ होता है और उनके इरादे भी बहुत नेक होते हैं। कभी-कभी बच्चे ऐसा कुछ कर देते हैं- जो सबके लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसा ही कुछ किया है सिरमौर जिले की बेटी विभूति चौहान ने। विभूति चौहान ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए सबको भावुक कर दिया है।
जन्मदिन पर दिखाई अनोखी सोच
जहां अधिकांश बच्चे अपने जन्मदिन पर उपहार पाने और जश्न मनाने का इंतजार करते हैं, वहीं प्रदीप चौहान की बेटी विभूति ने अपने विशेष दिन को मानवता की सीख में बदल दिया। विभूति एक व्यक्ति के इलाज लिए अपनी गुल्लक तोड़ दी।
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हादसे में खो दी टांग
दरअसल, पांवटा साहिब उपमंडल के भूपपुर गांव में रहने वाले शौकत अली हाल ही में एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गए। हादसे में उन्होंने अपनी एक टांग खो दी। हादसे ने न सिर्फ उनका शारीरिक संतुलन छीना, बल्कि परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से भी हिला कर रख दिया।
11,000 रुपये दी मदद
अपने पिता को शौकत अली की परेशानी और इंसानियत के प्रति किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए विभूति ने बिना दूसरा विचार किए अपनी गुलक तोड़ दी और उसमें जमा 11,000 रुपये शौकत अली के इलाज के लिए दे दिए। यह मात्र एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा है कि छोटी उम्र में भी बड़ा दिल होना जरूरी है।
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पिता भी हुए भावुक
विभूति चौहान के पिता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप चौहान कुछ दिन पहले शौकत अली और उनकी पत्नी आस्मीन के साथ मिलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने जनता से अपील की थी कि शौकत के इलाज में मदद की जाए क्योंकि इलाज में भारी धनराशि की जरूरत है।
बेटी पर पिता को गर्व
बेटी द्वारा दिया गया यह योगदान देखकर प्रदीप चौहान खुद भी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह कदम न सिर्फ उनके परिवार के संस्कारों की झलक है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि मुश्किल घड़ी में एकजुट होना ही सच्चा मानव धर्म है।
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इलाज के लिए जुट रही है मदद
शौकत अली हादसे के बाद से बिस्तर पर हैं, और उनकी पत्नी भी लगातार उनकी देखभाल में जुटी है। परिवार की आय बेहद सीमित होने के कारण इलाज का खर्च वहन करना उनके लिए संभव नहीं। अब तक क्राउड फंडिंग के जरिए लगभग 50,000 रुपये जुटने वाले हैं। वहीं आज प्रदीप चौहान खुद शौकत अली के घर पहुंचे और विभूति द्वारा दी गई 11,000 रुपये की राशि उन्हें सौंप दी।
समाज के नाम अपील
प्रदीप चौहान ने कहा कि शौकत अली का उपचार लंबा और महंगा है। उन्होंने एक बार फिर समाज से अपील की कि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करें, ताकि शौकत जल्द ठीक होकर सामान्य जीवन जी सके।
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विभूति बनी प्रेरणा
13 साल की विभूति चौहान का यह कदम न सिर्फ शौकत के परिवार के लिए राहत है, बल्कि पूरे क्षेत्र में इंसानियत की नई मिसाल बन गया है। एक छोटी सी बच्ची ने दिखा दिया कि मदद करने के लिए उम्र नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए।
