नई दिल्ली/शिमला। धनतेरस के दिन हिमाचल प्रदेश को बड़ा तोहफा मिला है, लंबे समय से हिमाचल प्रदेश सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही थी जिसका नतीजा अब सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के करीब 15 साल पुराने बकाया मामले में हिमाचल के हक़ में फैसला सुनाया है। फैसला आने पर हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे प्रदेश के लिए बड़ी जीत बताते हुए ख़ुशी जाहिर की। 

 

हिमाचल को अब मिलेंगें सालाना 1000 करोड़..


भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल को अपनी हक़ की बिजली मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है। CM सुक्खू ने कहा कि अगले 20 वर्षों तक प्रदेश को अपने हिस्से की बिजली मिलनी है, जिससे राज्य को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक़ अगर हम 6 रूपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बेचें तो हमें लगभग 500 करोड़ का राजस्व मिल सकता है। वहीं, अगर इससे ज्यादा की सहमती बनती है तो राज्य को 1000 करोड़ तक का राजस्व मिलने की संभावनाएं हैं।

 

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क्या है पूरा मामला, सुक्खू सरकार ने कैसे जीती जंग?

 

गौर रहे कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) का मामला हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के बिजली में हिस्सेदारी से जुड़ा पुराना विवाद है। भाखड़ा-नांगल और ब्यास नदी पर बने बिजली प्रोजेक्टों में हिमाचल के जल संसाधनों का भी इस्तेमाल होता है। हिमाचल की कई वर्षों से मांग थी कि इन परियोजनाओं से बनने वाली बिजली में उसे भी अपना हक़ मिले।

 

ऐसे में साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल को इन परियोजनाओं में लगभग 7 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी देने का अधिकार दिया था। लेकिन पुराने वर्षों में करीब 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का बकाया विवाद बना रहा। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार लगातार इस मामले पर अड़ी रही और आखिरकार सर्वोच्च अदालत से इसका फैसला हिमाचल के हक़ में आया। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इससे हिमाचल को सालाना 500 से 1,000 करोड़ रुपए तक की संभावित आमदनी हो सकती है।

 

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4 साल में सुक्खू सरकार ने लड़ीं 4 बड़ी लड़ाइयां..

 

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में हिमाचल के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए चार अहम मोर्चों पर लड़ाई लड़ी है। इनमें वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू, किशाऊ बांध और बीबीएमबी से जुड़े मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर मामले में प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए मजबूती से अपना पक्ष रखा। बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसी संघर्ष की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

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