पालमपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में कुछ लोग अपने शौक और स्वार्थ के लिए हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डालने से भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला कांगड़ा जिले के पालमपुर उपमंडल से सामने आया है, जहां शरारती तत्वों ने मछलियां पकड़ने के उद्देश्य से न्यूगल खड्ड के बहते पानी में जहरीला पदार्थ मिला दिया। हैरानी की बात यह है कि इसी खड्ड का पानी जल शक्ति विभाग की पेयजल स्कीमों के तहत हजारों लोगों के घर में पहुंचता है। घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। प्रशासन और संबंधित विभागों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पानी की आपूर्ति रोक दी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ऐसे हुआ जहरीले पानी का खुलासा
घटना का खुलासा उस समय हुआ जब स्थानीय लोगों ने न्यूगल खड्ड के ऊपर बड़ी संख्या में चील और कौवों को मंडराते देखा। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। खड्ड के पानी में सैकड़ों मछलियां मृत अवस्था में तैर रही थीं, जबकि कई मछलियां किनारों पर पड़ी मिलीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी ने जानबूझकर पानी में जहरीला पदार्थ मिलाया है, जिससे पूरे क्षेत्र का जलीय जीवन प्रभावित हुआ है। देखते ही देखते खड्ड का एक बड़ा हिस्सा मछलियों के शवों से भर गया।
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विभाग ने तुरंत बंद कर दी पेयजल योजनाएं
घटना की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने तत्काल कदम उठाए। विभाग के अधिकारियों ने न्यूगल खड्ड पर आधारित सभी पेयजल योजनाओं को एहतियातन बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि परौर, खड़ौठ, पुड़बा बलोटा, थुरल, भ्रांता और लाहड़ू सहित कई गांवों की करीब 16 हजार से अधिक आबादी इसी जल स्रोत पर निर्भर है। पानी में जहरीले तत्वों की आशंका के चलते फिलहाल इन योजनाओं से पानी उठाना पूरी तरह रोक दिया गया है।
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विभाग के अधिशासी अभियंता संदीप चौधरी ने आपातकालीन आदेश जारी करते हुए न्यूगल नदी पर स्थापित सभी ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई स्कीमों (पेयजल योजनाओं) को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है। विभाग ने साफ किया है कि जब तक इस दूषित पानी के सैंपल की पूरी लैब रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक इन वाटर सोर्सेज से पानी की लिफ्टिंग पूरी तरह ठप रहेगी।
पानी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे
जल शक्ति विभाग ने खड्ड के विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाती, तब तक पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की जाएगी। विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
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पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब न्यूगल खड्ड को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी इसी वर्ष मार्च माह में खड्ड में जहरीला पदार्थ डालने की घटना सामने आई थी, जिसमें बड़ी संख्या में मछलियां मारी गई थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि उस मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते शरारती तत्वों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने दोबारा ऐसी हरकत कर दी।
मत्स्य विभाग और पुलिस जांच में जुटे
घटना की सूचना मिलते ही मत्स्य पालन विभाग की विशेष टीम को मौके पर भेजा गया। विभाग के अधिकारियों ने मृत मछलियों और पानी के नमूनों की जांच शुरू कर दी है। वहीं पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच में जुट गई हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।
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ग्रामीणों में आक्रोश, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि मछलियां पकड़ने के लिए खड्ड में जहर डालना केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर स्थायी रोक लग सके। पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर जल स्रोतों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
