ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में हुए बीते सोमवार को हुए दर्दनाक स्कूल वाहन हादसे के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। ऊना जिले के रायंसरी क्षेत्र में एक स्कूल वाहन की चपेट में आने से दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें से एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि दूसरी बच्ची का अस्पताल में उपचार चल रहा है। जहां एक ओर इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया वहीं दूसरी ओर अब मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं।

चालक गिरफ्तार, नहीं दिखा पाया लाइसेंस

पुलिस की प्रारंभिक जांच में लापरवाही की आशंका सामने आने के बाद चालक के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ा दी है।

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पुलिस ने दुर्घटना के आरोपित चालक को गिरफ्तार कर लिया है और उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि चालक अभी तक अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी पेश नहीं कर पाया है। इसके अलावा वह वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं करवा सका है, जिससे मामले में और भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बस से उतारकर दूसरे वाहन में बैठाए गए बच्चे

पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि जिस बस का स्कूल के साथ अनुबंध था, उसके सभी दस्तावेज वैध बताए जा रहे हैं और उसी बस में बच्चों को स्कूल से लाया गया था। लेकिन रास्ते में बच्चों को उस बस से उतारकर एक टेंपो ट्रैवलर में बैठा दिया गया।

बताया जा रहा है कि बच्चों को रायंसरी क्षेत्र में उसी टेंपो ट्रैवलर के माध्यम से छोड़ा जा रहा था, तभी यह हादसा हो गया। फिलहाल पुलिस को इस टेंपो ट्रैवलर के दस्तावेज भी नहीं मिले हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।

आरटीओ और स्कूल प्रबंधन से मांगा गया जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से भी जवाब मांग रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी वाहन के परमिट, पंजीकरण या अन्य जरूरी दस्तावेज समाप्त हो जाते हैं तो परिवहन विभाग को भी कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे में यह भी जांच की जा रही है कि कहीं विभागीय स्तर पर भी कोई लापरवाही तो नहीं हुई।

वाहन पर मिले खून के निशान

घटना के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम की मदद से मौके से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। फोरेंसिक जांच में वाहन पर बच्ची के खून के निशान पाए जाने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि दुर्घटना के समय की पूरी घटना का क्रम स्पष्ट हो सके।

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पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से उस दिन की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग और वाहन से जुड़े सभी दस्तावेज भी मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्कूल वाहनों के लिए ये हैं नियम

1. वैध पंजीकरण और परमिट
   स्कूल में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन के पास वैध रजिस्ट्रेशन और परमिट होना अनिवार्य है। बिना वैध परमिट के वाहन का उपयोग नहीं किया जा सकता।

2. फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी
   वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट समय-समय पर नवीनीकृत होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वाहन सुरक्षित हालत में है।

3. स्कूल के नाम का स्पष्ट उल्लेख
   वाहन पर साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि यह वाहन स्कूल के बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कई मामलों में वाहन पर “School Bus” या स्कूल का नाम लिखना जरूरी होता है।

4. चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस
   वाहन चलाने वाले चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उसे व्यावसायिक वाहन चलाने का अनुभव भी होना चाहिए।

5. चालक का पुलिस सत्यापन
   बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए चालक का पुलिस वेरिफिकेशन होना अनिवार्य है।

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6. वाहन में परिचालक (अटेंडेंट) की व्यवस्था
   छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन में एक अटेंडेंट या हेल्पर होना चाहिए, जो बच्चों को सुरक्षित चढ़ाने-उतारने में मदद करे।

7. स्कूल और वाहन मालिक के बीच लिखित अनुबंध
   यदि स्कूल बाहरी वाहन (जैसे बस या टेंपो ट्रैवलर) किराये पर लेता है, तो स्कूल और वाहन मालिक के बीच लिखित अनुबंध होना जरूरी है।

8. वाहन की जानकारी प्रशासन को देना
   स्कूल को वाहन से संबंधित पूरी जानकारी जैसे वाहन नंबर, चालक का विवरण और परमिट की जानकारी परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को देनी होती है।

9. सुरक्षा मानकों का पालन
   वाहन में फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और जरूरी सुरक्षा उपकरण होने चाहिए।

10. क्षमता से अधिक बच्चे न बैठाना
    वाहन में तय क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इस पर कार्रवाई हो सकती है।


इन नियमों का उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि कोई स्कूल या वाहन मालिक इनका पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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