शिमला। हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में पैर पसार रहे नशा तस्कर अब पुलिस को चकमा देने के लिए ऐसे-ऐसे शातिर और नए हथकंडे अपना रहे हैं, जिन्हें देखकर खाकी भी हैरान है। राजधानी शिमला में नशा तस्करी का एक ऐसा ही सनसनीखेज 'हाईटेक फॉर्मूला' सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के होश उड़ा दिए हैं। पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क को तोड़ते हुए तीन शातिर आरोपियों को दबोचा है। यहां तस्करों ने चिट्टा बेचने और पहुंचाने का ऐसा तरीका अपनाया था, जिसमें खरीदार और सप्लायर का आमना-सामना तक नहीं होता था।
नशा तस्करी का सीक्रेट पैकेट मॉडल
पुलिस जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी चिट्टे को सीधे हाथों-हाथ नहीं बेचते थे। इसके बजाय नशे की खेप को दूध या कुरकुरे के खाली पैकेटों में पैक कर शहर के अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रख दिया जाता था। इसके बाद उन स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर मुख्य संचालकों को भेजी जाती थी।
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जब ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो जाता था, तब खरीदार को उस जगह की सटीक लोकेशन भेजी जाती थी। खरीदार वहां पहुंचकर सामान्य दिखने वाले पैकेट को उठाता और उसमें से नशा हासिल कर लेता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह तरीका इसलिए अपनाया गया था ताकि सप्लायर और ग्राहक के बीच सीधा संपर्क न हो और पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
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पुलिस ने नशे संग धरे थे बिहार के दो भाई
नशा विरोधी अभियान के तहत पुलिस थाना बालूगंज की टीम ने सबसे पहले एक आरोपी को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान मामले की परतें खुलती चली गईं। जांच आगे बढ़ने पर बिहार के भोजपुर निवासी दो भाइयों की भूमिका सामने आई, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनके माध्यम से पूरे नेटवर्क और सप्लाई चैन के महत्वपूर्ण सुराग मिले।
फरीदाबाद से दबोचा मुख्य सप्लायर
मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और मोबाइल डेटा का गहन विश्लेषण किया। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी मुख्य सप्लायर रवि अहिरवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ समय से उत्तर भारत में सक्रिय रहकर हिमाचल में नशे की खेप पहुंचाने का काम कर रहा था। उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
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शहर में बनाई गई थीं ड्रॉप लोकेशन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शिमला के आईएसबीटी टूटीकंडी और उसके आसपास कई स्थानों को ड्रग डिलीवरी प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल करते थे। तस्कर पहले से तय स्थानों पर पैकेट रख देते थे और बाद में खरीदारों को लोकेशन साझा कर देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में मोबाइल वीडियो, ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता था।
तीन महीने में 1.25 करोड़ रुपये का लेन-देन
जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन के भी अहम सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केवल तीन महीने के दौरान इस सप्लाई चैन से करीब 1.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की पूरी आर्थिक संरचना को उजागर किया जा सके।
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नशा माफिया पर पुलिस का बड़ा प्रहार
शिमला पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में नशा तस्करी के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इस दौरान कई ड्रग सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है और केवल नशा बरामद करने तक सीमित रहने के बजाय सप्लाई चेन और इसके स्रोत तक पहुंचने की रणनीति अपनाई गई है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष नशे की आपूर्ति से जुड़े कई लोगों को बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर गिरफ्तार किया गया है और नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास जारी है।
पुलिस के सामने नई चुनौती बना हाईटेक ड्रग नेटवर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्कर अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर तकनीक आधारित और गुप्त नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। कुरकुरे और दूध के पैकेटों के जरिए की जा रही सप्लाई इस बात का संकेत है कि नशा कारोबारियों ने पुलिस से बचने के लिए नए तरीके विकसित कर लिए हैं। हालांकि शिमला पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। अब पुलिस की नजर उन लोगों पर भी है जो इस चेन में सप्लायर, बिचौलिए या खरीदार के रूप में जुड़े हुए हैं।
