शिमला देव भूमि कहे जाने हिमाचल प्रदेश को आए दिन किसी न किसी अपराधिक मामले के चलते शर्मसार होना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला प्रदेश की राजधानी शिमला से सामने आया है, जहां एक सौतेले पिता ने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। जिसे लेकर अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

मामला कैसे सामने आया

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 2 जून 2021 को शिमला के एक सरकारी स्कूल की प्रधानाचार्या ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने स्कूल प्रशासन को बताया कि उसका सौतेला पिता कई महीनों से उसके साथ यौन शोषण कर रहा है।

 

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मामला इतना गंभीर था कि पीड़िता गर्भवती भी हो चुकी थी। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और विस्तृत जांच शुरू की गई।

अदालत में पेश किए 30 गवाह

जांच की कमान एसआई हेतराम को सौंपी गई। उन्होंने पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार), 354, 354A तथा पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 4, 6 और 8 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने सारे दस्तावेज़ी साक्ष्य इकट्ठा करने के बाद अदालत में चालान प्रस्तुत किया।

 

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सरकार की ओर से उप-न्यायवादी संगीता जस्टा ने कोर्ट में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 30 गवाहों को अदालत में पेश कर आरोपी की करतूतों को साबित किया। कोर्ट में गवाही और तथ्यों के आधार पर अंततः आरोपी को दोषी पाया गया।

यह मिली सजा

विशेष पोक्सो अदालत के न्यायाधीश विवेक शर्मा ने सौतेली बेटी से लंबे समय तक दुष्कर्म करने वाले आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे 25 वर्षों के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत 25 वर्षों का कठोर कारावास और ₹20,000 का जुर्माना और

 

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पॉक्सो एक्ट की धारा 8 तथा IPC की धारा 354 और 354A के तहत 5 वर्षों का कठोर कारावास और जुर्माना। साथ ही, कोर्ट ने पीड़िता को ₹4 लाख रुपये की मुआवज़ा देने की सिफारिश भी की है, जिससे उसका पुनर्वास और मानसिक-सामाजिक सहयोग सुनिश्चित किया जा सके

समाज के लिए एक संदेश

यह मामला न केवल एक नाबालिग लड़की के जीवन को झकझोर देने वाला है, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि घर के भीतर मौजूद लोग ही जब सुरक्षा के नाम पर विश्वासघात करें, तो न्याय व्यवस्था किस प्रकार पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करती हैइस फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि पोक्सो कानून के अंतर्गत गंभीर अपराधों पर न्यायपालिका सख्ती से कार्रवाई कर रही है

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