कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में आए दिन बच्चियों, युवतियों और महिलाओं के साथ हो रहे दुराचार के मामले में सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में इंसाफ पाने के लिए ज्यादातर पीड़िताओं को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। मगर धर्मशाला की फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो अदालत ने लगभग 19 महीने की सुनवाई के बाद दोषी को कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला फरवरी 2025 को महिला थाना धर्मशाला में दर्ज हुआ था। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वो अपने नाना के साथ रहती थी। उसने बताया कि नाना ने उसे डरा-धमकाकर उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो वह उसे जान से मार देगा।
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नाना को पुलिस ने किया गिरफ्तार
आरोपी की धमकियों से डरी हुई पीड़िता काफी समय तक चुप रही। मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण करवाया गया और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जुटाया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में कितने गवाह हुए पेश?
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ सभी जरूरी दलीलें पेश कीं। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 25 अहम गवाहों के बयान पेश किए। इसके अलावा वैज्ञानिक साक्ष्य और दूसरे जरूरी सबूत भी रखे गए। साथ ही पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और बयान अदालत में पेश किए गए।
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अदालत ने सुनाई सख्त सजा
सभी गवाहों, वैज्ञानिक सबूतों और रिकॉर्ड का गहन अध्ययन करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। इसके बाद अदालत ने उसे पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा ना करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। ये फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीर विजय लक्ष्मी की विशेष पॉक्सो अदालत में सुनाया गया है।
