शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ जारी मुहिम के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा संदेश दिया है। चिट्टा.मुक्त हिमाचल अभियान के तहत नशा तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को सीधे नौकरी से बाहर किया जा रहा है। सरकार की नशे के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस नीति ने यह स्पष्ट कर दिया गया है कि दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
4 पुलिस कर्मियों पर गिरी गाज
इसी कड़ी में न्यू शिमला थाना क्षेत्र में सामने आए करीब एक करोड़ रुपये के एलएसडी मामले में संलिप्त पाए गए चार पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। एसटीएफ कुल्लू से जुड़े इन पुलिसकर्मियों कांस्टेबल नितेश, कांस्टेबल अशोक, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार एवं हेड कांस्टेबल समीर कुमार को विभागीय जांच के बाद तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई सख्त नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें नशे के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
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पहले निलंबन, फिर गिरफ्तारी...
CID के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के बाद गिरफ्तार किया गया और अदालत से चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की नीति नशा तस्करी जैसे मामलों में पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब तक 21 पुलिस कर्मियों की गई नौकरी
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नशा तस्करी या इसके नेटवर्क से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस विभाग के भीतर भी भ्रष्टाचार और नशे के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। यही कारण है कि इस ताजा कार्रवाई के साथ नशा संबंधित मामलों में बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। यह कदम पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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फैले नेटवर्क की जांच
जिला शिमला में पकड़ी गई LSD की खेप ने जांच को अब कुल्लू तक पहुंचा दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नशीला पदार्थ गोवा से लाया गया और शिमला पहुंचने से पहले कुल्लू में इसकी सप्लाई चेन सक्रिय थी।
STF के चार पुलिसवाले अरेस्ट
इसी कड़ी में STF के चारों पुलिस कर्मियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जो उस समय कुल्लू क्षेत्र में तैनात थे। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि पुलिस कर्मियों और तस्करों के बीच यह गठजोड़ कब से चल रहा था और कितने समय से प्रदेश में इस तरह का नेटवर्क सक्रिय था।
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उठ रहे गंभीर सवाल
खास तौर पर नविएल हैरिसन नाम के एक कथित सप्लायर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जिस पर पहले से ही कुल्लू क्षेत्र में नशा तस्करी से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस की जांच प्रारंभिक चरण में है, लेकिन जिस तरह के आरोप सामने आए हैं- उन्होंने STF जैसी विशेष इकाई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस रिमांड पर चारों आरोपी
आरोप है कि संबंधित कर्मियों ने पहले नशे की खेप को पकड़ा, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। जिसके बाद वही LSD शिमला तक पहुंच गई। गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 23 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि इस पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका क्या थी और किन-किन लोगों से उनके संपर्क थे।
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पुलिस की आम जनता से अपील
पुलिस ने आम नागरिकोंए विशेषकर युवाओं से अपील की है कि नशे से संबंधित किसी भी जानकारी को तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस थाना में साझा करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सरकार और पुलिस का कहना है कि जनसहभागिता के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और सुक्खू सरकार इस दिशा में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
