शिमला। हिमाचल की राजधानी शिमला से करीब 12 दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए पिता-पुत्री की तलाश का दर्दनाक अंत हुआ है। कुमारसैन क्षेत्र से लापता 18 वर्षीय स्नेहा का शव भी सतलुज नदी से बरामद कर लिया गया है। इससे पहले लापता होने के करीब आठ दिन बाद उसके पिता कुलदीप राणा का शव भी सतलुज नदी से मिला था। अब बेटी का शव मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।

12 सितंबर को दोनों हुए थे अचानक लापता

जानकारी के अनुसार कुलदीप राणा अपनी 18 वर्षीय बेटी स्नेहा के साथ कुमारसैन गए थे। दोनों के देर रात वापस घर लौटने की बात सामने आई थी। इसी दौरान कुलदीप की अपनी पत्नी से फोन पर बातचीत भी हुई थी। उन्होंने करीब 10 मिनट में घर पहुंचने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद पिता-पुत्री घर नहीं पहुंचे। काफी देर तक इंतजार के बाद जब दोनों का कोई पता नहीं चला तो परिवार की चिंता बढ़ गई। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने उनकी तलाश शुरू की।

 

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सड़क किनारे मिली पिकअप, टूटा हुआ था शीशा

तलाशी अभियान के दौरान कुलदीप राणा की पिकअप सड़क किनारे मिली। वाहन को देखकर परिवार की चिंता और बढ़ गई, क्योंकि गाड़ी का एक शीशा टूटा हुआ था। वाहन के सड़क किनारे मिलने और पिता-पुत्री के अचानक गायब होने से घटना को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे। परिजनों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आखिर सड़क किनारे खड़ी पिकअप से दोनों सतलुज नदी तक कैसे पहुंचे?

पहले मिला पिता का शव, अब बेटी भी मृत बरामद

पिता-पुत्री की तलाश के बीच करीब आठ दिन बाद कुलदीप राणा का शव सतलुज नदी से बरामद हुआ। परिवार को उम्मीद थी कि शायद स्नेहा सुरक्षित मिल जाए, लेकिन करीब 12 दिन बाद उसकी तलाश भी बेहद दुखद मोड़ पर पहुंची। अब स्नेहा का शव भी सतलुज नदी से बरामद कर लिया गया है। एक के बाद एक पिता और बेटी के शव नदी से मिलने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है।

 

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कुलदीप की सौतेली बेटी थी स्नेहा

बताया जा रहा है कि स्नेहा कुलदीप की सौतेली बेटी थी। कुलदीप ने दूसरी शादी सुनीता से की थी। सुनीता से कुलदीप के दो बच्चे हैं, जिसमें बेटा दूसरी कक्षा और बेटी चौथी कक्षा में पढ़ती है। कुलदीप की पहली शादी से दो बेटियां हैं जो सुनीता के साथ ही रहती थीं। स्नेहा कुलदीप की पहली पत्नी की बड़ी बेटी थी। 

ओगली के पास मिली थी आखिरी लोकेशन

जांच के दौरान सामने आया कि पिता-पुत्री की आखिरी लोकेशन ओगली क्षेत्र में पेट्रोल पंप के पास मिली थी। इसके बाद दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसी इलाके के पास कुलदीप की पिकअप भी सड़क किनारे से बरामद हुई थी। वाहन का कंडक्टर साइड का शीशा टूटा होने के कारण परिजनों के मन में घटना को लेकर शुरू से ही कई सवाल उठते रहे हैं।

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गाड़ी से नदी तक कैसे पहुंचे पिता-पुत्री?

मामले में सबसे बड़ी पहेली यह बनी हुई है कि जब पिकअप सड़क किनारे मिली तो आखिर कुलदीप और स्नेहा सतलुज नदी तक कैसे पहुंचे। क्या दोनों किसी वजह से खुद नदी की ओर गए थे, हादसा हुआ या घटनाक्रम के पीछे कोई और वजह थी—इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इन परिस्थितियों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

परिवार ने जताई हत्या और अपहरण की आशंका

कुलदीप का शव मिलने के बाद परिजनों ने घटना को लेकर गंभीर आशंका जताई थी। परिवार की ओर से पुलिस से मांग की गई कि मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जाए। परिजनों ने हत्या या अपहरण की आशंका भी जताई है। हालांकि, ये आशंकाएं फिलहाल परिवार की ओर से व्यक्त की गई हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पिता-पुत्री की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

कुलदीप राणा मंडी जिले के करसोग क्षेत्र के चराई गांव के रहने वाले थे। परिवार के अनुसार वह घर के अहम सहारे थे और लंबे समय से अपनी मां की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। पिता की मौत के बाद परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अब 18 वर्षीय स्नेहा का शव मिलने की खबर ने दुख को और गहरा कर दिया। पिता-पुत्री की मौत से परिवार में चीख-पुकार मची हुई है और क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।

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पुलिस जांच से खुलेगा मौत का राज

पिता और बेटी दोनों के शव सतलुज नदी से मिलने के बाद अब पुलिस के सामने घटना की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। आखिरी लोकेशन, सड़क किनारे मिली पिकअप, टूटा हुआ शीशा और दोनों के नदी तक पहुंचने की परिस्थितियां जांच का अहम हिस्सा बन सकती हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थितियां थीं।

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